महिलाएं करा रहीं एनीमिया का उपचार
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जनपद में 23 पीएचसी, एक जिला अस्पताल व आठ सीएचसी हैं। जिनमें रोजाना 750 से अधिक महिलाएं विभिन्न रोगों से ग्रस्त होने पर उपचार कराने के लिए आती हैं। जिनमें से लगभग 175 गभर्वती, 115 सामान्य महिलाएं व 60 किशोरियां एनीमिया रोग से ग्रस्त होने के चलते उपचार करा रही हैं।
एनीमिया के लक्षण
एनीमिया का मतलब है हीमोग्लोबिन में कमी होना है। थकान, काम करने में मन न लगना, सुस्ती बनी रहना आदि इसके लक्षण हैं। इससे आंत की बीमारी में शरीर में पोषक तत्वों का अवशोषण प्रभावित हो जाता है। वहीं, महिलाओं में मासिक धर्म के दौरान खून की कमी होने और इसके अनुपात में पोषक तत्वों का सेवन न करने से महिलाओं में इसका जोखिम अधिक रहता है।
एनीमिया से बचाव का तरीका
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात महिला रोग विशेषज्ञ डाॅ. शहजमानी मुताबिक बदलती जीवनशैली के साथ आहार संबंधी आदतों में होने वाला बदलाव से महिलाएं एनीमिया से ग्रस्त हो रही हैं। इनमें तत्काल सुधार की आवश्यकता है। वहीं, गर्भावस्था में मौसमी हरी सब्जियां, फल, गुड़, चना, पालक, मेथी आदि का सेवन करें। मां के स्वस्थ होने से गर्भस्थ शिशु तंदुरुस्त होगा। रक्त की कमी से बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित होता है। इसका असर उस पर उम्र भर रहता है। इसलिए समय रहते सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
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ऐसे होता है एनीमिया
-दो बच्चों के जन्म में अंतर कम होना।
-मां का स्वास्थ्य प्रभावित होने का बच्चों पर असर पड़ना।
-मां का पर्याप्त दवा एवं आहार न लेना।
एनीमिया से ये हो सकती है परेशानी
-बार-बार बीमार होना। कृमि से पूरी तरह से बचाव करना।
-कुपोषण के शिकार होने का खतरा।
-गर्भ में बच्चे का ठीक से विकास नहीं हो पाता है।
-गर्भपात का खतरा बना रहता है।
-ऑक्सीजन की कमी होने लगती।
-बच्चों का शारीरिक व मानसिक विकास रुकना, चिड़चिड़ापन होना, भूख न लगना।
-प्रसव के बाद अधिक रक्तस्राव होने से जच्चा की जान को खतरा रहता है।
सामान्य महिला को चाहिए 11 फीसदी हीमोग्लोबिन
एक सामान्य महिला के शरीर में 11 से 15 ग्राम प्रति डेसीलीटर रक्त होना चाहिए। सात ग्राम प्रति डेसीलीटर से कम रक्त होना अधिक खतरनाक है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को एनीमिया से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से कई योजनाएं चल रही हैं। शासन से पौष्टिक आहार का सेवन करने के लिए धनराशि तक दी जाती है ताकि गर्भावस्था में महिलाएं पौष्टिक आहार का सेवन कर सकें। -डाॅ. विजय कुमार, सीएचसी अधीक्षक