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हर माह साढ़े चार करोड़ खर्च से भी शहर नहीं साफ  

Sat, 06 May 2017 10:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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नगर निगम सफाई पर हर माह साढ़े चार करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी शहर को कूड़े से निजात नहीं दिला पा रहा है। स्मार्ट सिटी योजना में भी इन्हीं कारणों से नगर निगम दो बार परीक्षा में पास नहीं हो पाया था। बृहस्पतिवार को जारी स्वच्छता सूची में शहर को 339वां स्थान मिला था। इतना सब होने के बाद भी नगर निगम अधिकारी सफाई के प्रति गंभीर नहीं हैं।
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महानगर में सफाई करने के लिए 2215 आउट सोर्सिंग पर सफाई कर्मचारी हैं। इनके वेतन पर प्रतिमाह एक करोड़ 64 लाख रुपये निगम खजाने से खर्च होते हैँ। इसके अलावा निगम में लगभग 900 स्थायी सफाई कर्मचारी हैं। इनके वेतन पर लगभग दो करोड़ रुपये खर्च होता है। एक करोड़ रुपये निगम के कूड़ा ढोने वाले वाहनों के डीजल और रखरखाव पर खर्च होते हैं।

टीम और जनता है असंतुष्ट
नियमानुसार दो टाइम सफाई की जगह शहर में बमुश्किल एक ही टाइम सफाई होती है। कई इलाकों तो ऐसे हैं, जहां कई-कई दिन तक सफाई कर्मचारी नहीं जाते। सफाई पर स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत केंद्र सरकार की जांच टीम के साथ पार्षद और जनता भी असंतुष्ट है। 
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सफाई से ज्यादा संसाधन खरीद पर ध्यान
नगर निगम के पास आवश्यकता से ज्यादा कूड़ा ढोने वाले वाहन हैं। प्रतिदिन प्रमुख स्थान और सड़कों पर चूना डालने और नालों की पर्याप्त सफाई का नियम है। इसके लिए सरकार ने अलग से नगर स्वास्थ्य अधिकारी की तैनाती की हुई है, लेकिन नगर स्वास्थ्य अधिकारी शहर की सफाई से ज्यादा वाहन, चूना, डस्टबिन, सफाई के अन्य संसाधन की खरीद पर अधिक ध्यान रखते रहे हैं। इसका पता पिछले दिनों नगर स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा खरीदे गए डस्टबिन में घोटाला उजागर होने से भी चलता है।

नहीं है व्यवस्था
शहर में दो टाइम सफाई कराने की व्यवस्था पर अमल नहीं किया जा रहा है। डोर टू डोर कूड़े का उठना, सफाई कर्मचारियों की मौके पर ही उपस्थिति लेना, नाला गैंग द्वारा प्रतिदिन नालों की सफाई करना, गाड़ियों में जीपीएस लगना, प्रतिदिन चूना पट्टी, बायोमीट्रिक मशीनें से हाजिरी लगाने की कोई व्यवस्था नहीं है।

एक माह में दिखेगा असर
दो टाइम सफाई कराने की तैयारी चल रही है। उपस्थित के लिए बायोमीट्रिक मशीन, वाहनों में जीपीएस लगने वाले हैं। एक माह बाद शहर की सफाई व्यवस्था में फर्क नजर आएगा।  -डॉ. कुंवर सेन, नगर स्वास्थ्य अधिकारी नगर निगम

सफाई का रहा है बड़ा मुद्दा  
महानगर में सफाई का बड़ा मुद्दा रहा है। पांच साल में काफी सुधार भी हुआ है। पूर्व की सपा सरकार ने कई मामलों में ध्यान नहीं दिया। नगर स्वास्थ्य अधिकारियों की मंशा में भी खोट रहा है। अब एक माह के बाद शहर की सफाई में अंतर दिखाई दिखेगा। -हरिकांत अहलुवालिया, महापौर। 

मवाना पालिका से भी नहीं ली सीख  
 जनपद की मवाना नगर पालिका मेरठ के लिए ही नहीं बल्कि पूरे उप्र के लिए नजीर है। यहां तीन टाइम सफाई, आरओ पानी, एलईडी, सोडियम, सौर ऊर्जा, चूना पट्टी, बायोमीट्रिक हाजिरी, पालिका की आय व्यय का ऑनलाइन ब्योरा, जीपीएस, ऑनलाइन आय व्यय का ब्योरा आदि की व्यवस्था है। ये सब यहां ऐसी योजनाओं के प्रपोजल जारी होने से पहले से उपलब्ध हैं।  नगर निगम यदि मवाना नगर पालिका से भी सीख लेता तो परिणाम सकारात्मक होता। इस संबंध में नगर पालिका मवाना के चेयरमैन डॉ. नरेश चंद्रा ने कहा कि उन्होंने मवाना को जैसा बनाने का सपना देखा था, वैसा बनाया। मवाना नगर पालिका की कई बार उप्र सरकार सराहना कर चुकी है। अब भी हमने प्रधानमंत्री और उप्र सरकार के मुख्यमंत्री को मवाना नगर पालिका की उपलब्धियां भेजी हैं। हम पूरे विश्वास के साथ कहते है कि यदि केंद्र सरकार स्वच्छ भारत मिशन में मवाना नगर पालिका को शामिल करके सफाई का मूल्यांकन कराती तो हम देश में मेरठ जनपद का नाम रोशन करते।   
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