मेरठ। नगर पंचायत हर्रा और खिवाई की अधिशासी अधिकारी मंडलायुक्त के आदेश पर भारी पड़ती दिख रही हैं। मंडलायुक्त उनके खिलाफ 13 नवंबर को निलंबन की संस्तुति कर शासन को पत्र लिख चुकी हैं। हालांकि वह अब भी पद पर बनी हुई हैं।
ये है पूरा मामला
हर्रा और खिवाई के सभासदों के साथ आम जनता द्वारा शिकायतें की गई थीं। जिसमें हैंडपंप मानक के अनुरूप न लगाए जाने समेत तमाम वित्तीय अनियमितता शामिल थीं। मंडलायुक्त के आदेश पर तत्कालीन जिलाधिकारी अनिल ढींगरा ने एसीएम ब्रह्मपुरी से जांच कराई थी। इसमें शिकायतें सही पाए जाने पर मंडलायुक्त अनीता सी मेश्राम ने बीती 13 नवंबर को अधिशासी अधिकारी पवित्रा को निलंबन संस्तुति कर शासन को पत्र भेजा था। हालांकि अभी तक कार्रवाई नहीं हुई है।
हर जगह मिली हैं शिकायतें
पवित्रा हर्रा और खिवाई से पहले कई नगर पंचायतों में अधिशासी अधिकारी रही हैं। वहां भी वित्तीय अनियमितता के मामले सामने आए। उन पर नियमों को दरकिनार कर चहेतों को अहम पद सौंपने के आरोप लगे थे।
आय से अधिक संपत्ति की भी शिकायत
अधिशासी अधिकारी पवित्रा के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की शिकायत प्रशासन और शासन में है। इसकी गोपनीय जांच चल रही है। बताया कि उनके मेरठ में कई मकान और प्लॉट आदि के साथ महंगी गाड़ियां भी हैं। इनकी जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई तय होगी।
ठेकेदारों ने भी की शिकायतें
जिन ठेकेदारों ने नगर पंचायतों में काम किया, अब उनका कमीशन को लेकर विवाद है। इसके चलते भुगतान नहीं हो रहा है। इन ठेकेदारों ने भी शिकायत की है।
मंशा पर उठ रहे सवाल
मंडलायुक्त निलंबन की संस्तुति कर शासन को रिपोर्ट भेज चुकी हैं। इसके बावजूद वह पद पर बनी हुई हैं। इससे कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहा है। वहीं, चर्चा है कि राजनीतिक रसूख के चलते अधिशासी अधिकारी भारी पड़ रही हैं।