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कैंट बोर्ड ने आंख मूंदकर बनाया शुल्क वसूली का प्लान, चौतरफा विरोध के उठ रहे स्वर, जनता जाम से परेशान

Mon, 09 Dec 2019 02:43 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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meerut cantt - फोटो : अमर उजाला
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कैंट बोर्ड द्वारा आधी अधूरी तैयारियों के बीच शहर के 11 स्थानों पर प्रवेश शुल्क वसूली से रविवार को भी भीषण जाम से हालात बिगड़े रहे। शहर के लोगों ने यह फरमान लागू करने वालों को कोसते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी।

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सवाल किए कि क्या हाईवे पर कहीं भी ऐसे ही बैरियर लगा दिए जाते हैं? तेजी से आ रही गाड़ी को अचानक रोक लिया जाता है? इससे तो न सिर्फ बड़ा हादसा हो सकता है बल्कि यह जाम का सबब भी बन रहा है। लेकिन कैंट में वाहन प्रवेश शुल्क वसूलने के लिए सारा प्लान मानों आंखें मूंदकर ही बना लिया गया। यही वजह है कि रुड़की और मवाना रोड के हाईवे होने के बावजूद यहां पर इस तरह की लापरवाही की जा रही हैं।

कैंट बोर्ड जहां अपना राजस्व वसूलने में लगा है वहीं, शहर हलकान है। रविवार को भी वसूली प्वाइंटों से गुजरने वाले लोगों को जाम में फंसना पड़ा। कोई बाइक सवार अचानक आगे चल रहे वाहन के रुकने पर फिसलकर गिर गया तो कोई कार चालक बस के अचानक से ब्रेक लगाने पर टकराते बचा। जो जाम में फंसा वो अफसरों को कोसते हुए बस यही बोलता रहा कि पहले से ही शहर में जाम की कोई कमी थी क्या? 

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शनिवार रात 12 बजे से कैंट बोर्ड ने 11 जगहों पर ही वाहन प्रवेश शुल्क की वसूली शुरू की तो रुड़की और मवाना रोड पर रात दो बजे के बाद तक वाहनों की कतारें लगी रहीं। रविवार को दिन में भी जाम के हालात बनते रहे।

रुड़की रोड, मवाना रोड और दिल्ली रोड पर बनाए गए प्रवेश शुल्क प्वाइंटों पर कर्मचारी बसों को देखकर बैरिकेडिंग लगाते तो दूसरे वाहन चालक इधर-उधर को स्टेयरिंग घुमाना शुरू कर देते। रुड़की रोड पर बसों को रोककर शुल्क वसूलकर पर्ची दी जा रही थी।

इस दौरान रोडवेज की अनुबंधित बस का चालक चिल्लाने लगा कि अभी तक पीछे से पर्ची कटवाकर आ रहा हूं, यहां फिर क्यों ले रहे हो? इस पर कर्मचारियों ने पर्ची दिखाने को कहा तो उसने बताया कि वो कंडक्टर के पास है। इस पूरे घटनाक्रम में तीन से चार मिनट लग गए।

पीछे वाहनों की कतार लगी तो हार्न का शोर सुनाई देने लगा। हालांकि यहां पर वाहनों की तेज स्पीड और अधिक संख्या को देखते हुए कर्मचारियों ने एक तरफ बिना बैरीकेडिंग के ही कॉमर्शियल वाहनों को रोककर शुल्क वसूला। मवाना रोड पर डेयरी फार्म के सामने बनाए गए प्वाइंट पर भी ऐसा ही हाल दिखा। लोग दिनभर परेशान होते रहे।

रोडवेज को देने होंगे एक लाख रोजाना
दिल्ली रोड पर फैज-ए-आम कॉलेज के सामने बनाए गए प्वाइंट पर सबसे ज्यादा परेशानी रोडवेज के अफसरों को है। आरएम रोडवेज नीरज सक्सेना का कहना है कि वे डीएम से मिलकर इस पर बात करेंगे कि रोडवेज बसों को इससे छूट दिलाई जाए। नहीं दी जाएगी तो पूरी रिपोर्ट लखनऊ मुख्यालय भेजी जाएगी। बता दें कि जहां पर ये प्वाइंट बनाया गया है कि यहां से कैंट में इंट्री से भैसाली बस स्टैंड की दूरी महज तीन सौ मीटर है। इसके लिए हर बस को 100 रुपये शुल्क देना होगा। तीनों मार्गों पर रोडवेज की करीब 1000 बसें रोजाना चलती हैं। एक चक्कर भी लगाया तो रोजाना के एक लाख रुपये अतिरिक्त देने होंगे।  

जाम का इंतजाम 
रुड़की-मवाना और दिल्ली रोड पर जाम में फंसने वाले लोगों से बात हुई उन्होंने बस यही कहा कि शुल्क वसूलो। लेकिन दूसरों को असुविधा क्यों दे रहे हो। कैंट बोर्ड को सोचना चाहिए था कि एक तरफ सरकार टोल प्लाजा पर लगने वाले जाम को खत्म करने के लिए फास्टैग लगा रही है। वहीं, कैंट बोर्ड ने वही पुराने ढर्रे पर बैरीकेडिंग लगवा दिए हैं। अरे! यही करना था तो टोल प्लाजा जैसी व्यवस्था भी तो करनी चाहिए थी। ये तो जाम का इंतजाम कर दिया गया है।  

भाजपाई बनाएंगे रणनीति 
कैंट में रुड़की रोड, मवाना रोड और दिल्ली रोड पर वाहन प्रवेश शुल्क वसूलने पर भाजपा के कैंट विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल ने सोमवार को कैंट विधानसभा के प्रमुख कार्यकर्ताओं की बैठक बुला ली है। विधायक इस मामले में बोर्ड के सदस्यों से भी जवाब मांग सकते हैं कि इस मामले में उन्होंने क्या किया। बैठक में विरोध की रणनीति बनाई जाएगी।
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कब तक झेलना पड़ेगा
मीनाक्षीपुरम निवासी सुमित ने बताया कि कॉमर्शियल वाहनों से अगर शुल्क वसूलना था तो यहां पर उसी प्रकार से व्यवस्था बनानी चाहिए थी। 

कोई जगह तो छोड़ दो
रक्षापुरम निवासी प्रीति का कहना है कि शायद शहर में कोई ऐसी जगह नहीं छोड़ना चाहते हैं जहां पर जाम न लगे। अब तक यहां जाम नहीं था अब रोजाना यहां भी जाम से जूझना पड़ेगा। 

समस्या रोज बढ़ेगी
शास्त्रीनगर निवासी अंकित चौधरी ने बताया कि ये समस्या आगे और भी बढ़ेगी। रात को नो एंट्री खुलने के बाद सबसे ज्यादा दिक्कत तब बढ़ेगी जब ट्रकों का लोड ज्यादा रहेगा।
 
हो जाएगा बड़ा हादसा
अम्हैड़ा निवासी वीरेंद्र सिंह ने अगर आप शुल्क लेते भी हैं तो कम से कम उसका ढंग तो ठीक हो। ऐसे तो बड़ा हादसा हो जाएगा।
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