नई व्यवस्था के तहत एक जुलाई से मनोरंजन कर विभाग समाप्त होकर जीएसटी में शामिल हो जाएगा। केंद्र सरकार में जीएसटी का बिल पारित हो चुका है। तमाम करों को एक साथ जोड़कर जीएसटी लागू होने पर मनोरंजन कर भी जीएसटी के दायरे में आ रहा है। जिस कारण मनोरंजन कर विभाग जो कि अब तक कलक्ट्रेट परिसर में जिलाधिकारी के निर्देशन में काम करता था, अब वाणिज्य कर विभाग के अंतर्गत काम करेगा। कार्यालय भी शिफ्ट होकर वाणिज्य कर कार्यालय चला जाएगा। विभागीय सूत्रों के अनुसार जिला मनोरंजन कर अधिकारी तब सहायक आयुक्त जीएसटी होंगे।
जिलाधिकारी कार्यालय में नवीनीकरण
मनोरंजन कर विभाग अब तक जिलाधिकारी के अधीन आता है। ऐसे में अब मनोरंजन के संसाधनों जैसे सिनेमा हॉल, वाटर पार्क, थिएटर आदि का लाइसेंस बनवाने या पुराने लाइसेंस का नवीनीकरण कराने का काम जिलाधिकारी कार्यालय से ही होगा। नई व्यवस्था में भी लाइसेंस प्रक्रिया डीएम कार्यालय में होगी।
टैक्स में कमी और मिलेगी छूट
मनोरंजन कर विभाग जीएसटी में समाहित होने के बाद टैक्स में कमी आएगी। अभी तक सिनेमा हॉल संचालकों से प्रति टिकट दर का 40 प्रतिशत टैक्स वसूला जाता है। जीएसटी में आने के बाद यह दर 25 प्रतिशत तक हो सकती है। इसके साथ ही मनोरंजन के छोटे संसाधनों को पूरी तरह टैक्स से छूट भी मिलेगी। इसमें झूला, सर्कस आदि के साथ साल में एक दो व्यापारिक मेला जैसे आयोजन करने वाले लोग भी शामिल हैं। क्योंकि जीएसटी में वार्षिक 20 लाख रुपये से ज्यादा के टर्नओवर पर टैक्स निर्धारित करने का प्रावधान है।
नई व्यवस्था में उठा एक सवाल
यह नई व्यवस्था जब प्रभावी होगी तो उसे लेकर एक सवाल भी उठ रहा है। इसमें मनोरंजन कर जो कि सिनेमा हॉल में अब 40 प्रतिशत लगता है, वह करीब 25 प्रतिशत हो जाएगा। ऐसे में कम हुए 15 प्रतिशत का लाभ किसे मिलेगा। क्योंकि यदि सिनेमा हॉल संचालक अपनी टिकट दर वर्तमान के अनुरूप ही रखते हैं तो इसका सीधे सीधे लाभ सिनेमा हाल संचालक को जाएगा। जबकि टैक्स कम होने का लाभ जनता को मिलना चाहिए। ऐसे में इस पर शिकंजा कैसे कसा जायेगा, इसकी कोई गाइड लाइन अभी शासन से नहीं आई है।