फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

निजीकरण के विरोध में विद्युत कर्मचारियों ने ऊर्जा भवन घेरा

विज्ञापन
मेरठ..कंवलजीत..अपनी मांगो को लेकर ऊर्जा भवन पर धरना प्रदर्शन करते बिजली विभाग के कर्मचारी.....स
विज्ञापन
मेरठ। पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण के निर्णय के विरोध में प्रदेशभर के सभी जिलों में विद्युत कर्मचारियों की ओर से विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। बुधवार को यहां भी ऊर्जा भवन पर बड़ी संख्या में विद्युत कर्मचारियों ने ऊर्जा भवन को घेर लिया। इसके बाद सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी कर रोष जताया।
विज्ञापन

कर्मचारी विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर यह प्रदर्शन किया गया। कर्मचारी दोपहर दो बजे के बाद ऊर्जा भवन पहुंचे। संघर्ष समिति और केंद्रीय कार्यकारिणी अभियंता संघ के सदस्य निखिल ने बताया घाटे के झूठे आंकड़े दिखाकर निजीकरण का निर्णय लिया गया है। इससे प्रदेश के बिजलीकर्मियों में काफी गुस्सा है। कर्मचारी सात माह से लगातार आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से एक बार भी वार्ता तक नहीं की गई है।
कर्मचारियों ने बताया कि अब उनकी ओर से पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल में नौ जुलाई को हड़ताल करने का निर्णय लिया गया है। यहां मेरठ में भी विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। बुधवार को सभी जिलों के साथ ही मुंबई, नागपुर, रायपुर, भोपाल, जबलपुर, वडोदरा आदि जगहों पर भी प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन करने वालों में रिटायर्ड इंजीनियर सीपी सिंह, कृष्णा साराश्वत, निखिल कुमार, गुरुदेव सिंह, रविंद्र कुमार, प्रेमपाल सिंह, अश्वनी कुमार, कपिल देव गौतम, जितेंद्र कुमार सहित अन्य शामिल रहे।
विज्ञापन

-
महंगी दरों पर बिजली खरीदने से बढ़ेगा अतिरिक्त भार
रिटायर्ड इंजीनियर सीपी सिंह, केके सारस्वत सहित अन्य ने बताया कि निजी घरानों से बहुत महंगी दरों पर बिजली खरीदने के कारण लगभग 10,000 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष का अतिरिक्त भार होगा। प्रदेश में सरकारी विभागों पर 14,400 करोड़ रुपये राजस्व बकाया है। सरकार की नीति के अनुसार किसानों को मुफ्त बिजली दी जा रही है। गरीबी रेखा से नीचे के बिजली उपभोक्ताओं को 3 रुपये प्रति यूनिट की दर पर बिजली दी जाती है, जबकि बिजली की लागत 7.85 रुपये प्रति यूनिट है। बुनकरों आदि को भी सब्सिडी दी जाती है। सब्सिडी की धनराशि ही लगभग 22,000 करोड़ रुपये है। सरकार इन सबको घाटा बताती है। इसी आधार पर निजीकरण का निर्णय लिया गया है। आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड और शासन के कुछ बड़े अधिकारियों की कुछ चुनिंदा निजी घरानों के साथ मिलीभगत है। अगर निजीकरण हुआ तो उपभोक्ताओं की सब्सिडी समाप्त हो जाएगी। उन्हें 10 से 12 रुपये प्रति यूनिट की दर पर बिजली खरीदनी पड़ेगी। निजीकरण के चलते कर्मचारियों को भी बाहर किए जाने की तैयारी है। यह सब नहीं रोका गया तो प्रदेशभर के कर्मचारी आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें