विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद मेरठ जोन के कुछ पुलिस अफसरों को अपने ट्रांसफर की चिंता सताने लगी है। इसके लिए सत्ताधारी नेताओं के अलावा दूसरे दलों के नेताओं से भी उन्होंने संपर्क साधना शुरू कर दिया है।
अभी तक पुलिस अफसर सत्ताधारी पार्टी के नेताओं को छोड़कर अन्य दूसरी पार्टी के नेता या पदाधिकारियों को ज्यादा भाव नहीं देते थे। लेकिन चुनावी नतीजों के कयासों के बीच उन्होंने दूसरी पार्टियों के नेताओं को भी अभी से साधना शुरू कर दिया है। सेटिंग भी इसलिए बनानी शुरू कर दी है कि कहीं नतीजे पलट गए तो कम से कम कुर्सी तो बची रहे। कुछ अफसरों द्वारा फोन पर बात भले ही विधानसभा चुनाव को लेकर की जा रही हो। लेकिन अपने को ईमानदार और निष्पक्ष बताते हुए जिस पार्टी के नेता से बात कर रहे हैं, उसकी पार्टी की सरकार बनने पर चर्चा हो रही है।
दरअसल सरकारी महकमे में माना जाता है कि जिसकी जातीय और क्षेत्रीय आधार के अलावा सत्ताधारी दल में पैठ है, वह मनचाही पोस्टिंग पा लेता है। पुलिस महकमा भी इससे अछूता नहीं है। अब प्रदेश में सरकार किसकी बनेगी, यह तो 11 मार्च को सामने आ जाएगा। लेकिन कुछ अफसर अभी से ही दूसरे दलों के नेताओं से इसलिए सेटिंग में लगे हैं कि यदि ट्रांसफर की नौबत आए तो अमुक जनप्रतिनिधि उसके काम आ जाए। बृहस्पतिवार को भी महकमे में यही चर्चा होती रही कि सरकार किसकी बनेगी। ज्यादा चिंता ऐसे अफसरों को बतायी गई जो पांच साल में सत्ता में अपना रसूख रखकर मनचाही तैनाती पाते रहे। जबकि दूसरे अफसर केवल इंतजार करते ही रह गए।
नई सरकार के इंतजार में अटके अभियंताओं के प्रमोशन
नई सरकार के इंतजार में अभियंताओं के प्रमोशन भी अटक गए हैं। ऐसे अभियंता भी हैं जिन्हें एक ही पद पर दो दशक से ज्यादा का समय हो गया है। प्रमुख सचिव शहरी आवास एवं नियोजन दो बार डीपीसी (डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी) की बैठक कैंसल कर चुके हैं। 22 अभियंता लाइन में हैं। उधर, अभियंता इस बाबत चुनाव आयोग को भी पत्र भेजने की तैयारी कर रहे हैं।
सूबे में 13 सहायक अभियंता ऐसे हैं जिन्हें प्रमोशन होकर एक्सईएन बनना है। मेरठ की बात करें तो यहां दो ऐसे ही सहायक अभियंता हैं जिन्हें दो दशक हो गए और अभी तक प्रमोशन नहीं हुआ। इसके अलावा सात एक्सईएन प्रमोट होकर अधीक्षण अभियंता बनने हैं। इसी तरह से दो अधीक्षण अभियंता मुख्य अभियंता बनने का इंतजार कर रहे हैं। बावजूद इसके अभी तक प्रमोशन नहीं हुए हैं। प्रमुख सचिव ने पहले 22 दिसंबर को इस बाबत डीपीसी की डेट रखी जो स्थगित कर दी। 15 फरवरी को भी यही किया गया। अब 15 मार्च को तारीख रखी है। अभियंता इस बाबत चुनाव अयोग का सहारा लेने की भी बात कह रहे हैं। दरअसल अभियंता दबी जबान में यह कह रहे हैं कि प्रमुख सचिव नई सरकार बनने और उसका मूड देखकर ही प्रमोशन करने के चक्कर में हैं।