दरें एक हों या फिर खेलों के सामान से हटे जीएसटी
मेरठ। मेरठ की खेल इंडस्ट्री का कारोबार प्रतिवर्ष 1 हजार करोड़ के करीब है, लेकिन खेल के सामान के जीएसटी में शामिल होने के बाद यह कारोबार प्रभावित हो रहा है। लकड़ी के बल्लों पर 12 प्रतिशत जीएसटी देनी पड़ती है, जबकि कपड़े के सामान बैटिंग ग्लब्ज, कीपिंग ग्लब्ज, खिलाड़ियों की ड्रेस सहित अन्य सामान पर 5 प्रतिशत से लेकर 18 प्रतिशत तक जीएसटी लगा है। जबकि जीएसटी से पहले खेल सामान पर किसी प्रकार का कोई कर नहीं देना पड़ता था। ऐसे में आम बजट में खेल कारोबारियों को वित्तमंत्री से उम्मीद है कि वे खेल उद्योग को संकट से उबारने के लिए बजट में खेल के सामान पर जीएसटी दर समान और न्यूनतम करें या फिर इस उद्योग को जीएसटी के दायरे से बाहर रखेंगी।
संकट से उबारना होगा खेल उद्योग को
जीएसटी लागू होने के बाद से खेल उद्योग संकट में आ गया है। कारोबारियों के साथ ही खिलाड़ियों पर भी इसका असर पड़ रहा है। सरकार को बजट में इसको ध्यान में रखते हुए खेल उद्योग को पूरी तरह से जीएसटी से बाहर रखना चाहिए या फिर जीएसटी स्लैब कम करना चाहिए। तभी खेल उद्योग संकट से उबर सकेगा। - वरुण मक्कड़, निदेशक एचआरएस कंपनी
5 लाख तक हो पूर्णतया छूट
इनकम टैक्स स्लैब में 5 लाख तक सालाना आमदनी में पूर्णतया छूट होनी चाहिए, उसके बाद 5 से 10 लाख तक आय वालों पर 10 प्रतिशत उससे ऊपर 15 प्रतिकर कर होना चाहिए। इससे सरकार को पहले से ज्यादा राजस्व की वसूली होगी। - अनुज सिंघल, अध्यक्ष सूरजकुंड स्पोर्ट्स गुड्स व्यापार संघ
शुरू हो लकड़ी का आयात
कश्मीर से अन्य प्रदेशों में लकड़ी के निर्यात पर रोक लगा दी गई, जबकि तैयार बल्ले वहां से आ रहे हैं। ऐसे में मेरठ का खेल कारोबार प्रभावित हो रहा है। अनुच्छेद 370 हटने के बाद कश्मीर से बल्ले की लड़की का आयात फिर शुरू होना चाहिए साथ ही जीएसटी से भी राहत देनी चाहिए। - भास्कर गर्ग, स्पोर्ट्स व्यापारी
लागू हो इंसेटिव
खेल उत्पादों का निर्यात लगातार गिर रहा है, सरकार से मिलने वाला इंसेटिव बहुत कम कर दिया है। आम बजट में व्यापारियों को निर्यातक पर मिलने वाला इंसेटिव पुरानी दरों को लागू करना चाहिए। जिससे व्यापारियों को राहत मिले। छोटे-बडे़ कारोबारियों को जीएसटी का एक स्लैब हो या जीएसटी पूरी तरह समाप्त हो। - विवेक कोहली, निदेशक स्टैग इंटरनेशनल
अलग-अलग स्लैब से व्यापारी परेशान
जीएसटी लागू होने के बाद व्यापारी परेशान हैं, खेल सामान पर अलग अलग जीएसटी ने कारोबारियों को परेशान किया है। पहले कर मुक्त खेल सामान जीएसटी दायरे में लाना गलत निर्णय था। सरकार को बजट में खेल सामान पर कर हटाकर खेलों को बढ़ावा देने की पहल करनी चाहिए। - रविंद्र सिंह, मालिक सिंधिया इंटरनेशनल
आम आदमी को दें राहत
आम बजट में सरकार को खेल ही नहीं हर क्षेत्र में आम आदमी को राहत देने की पहल करनी चाहिए। महंगाई बढ़ रही है जबकि आय के स्त्रोत में कमी ने लोगों को तोड़ दिया है। खेल कारोबार से भी खिलाड़ी जुड़े हैं, ऐसे में व्यापार को बढ़ाने के लिए बजट में जीएसटी सहित अन्य मामलों में राहत देनी चाहिए। - सरदार इकबाल सिंह, मालिक नारंग स्पोर्ट्स