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UP: छात्रवृत्ति घोटाले में बड़ी कार्रवाई, 13.83 करोड़ की संपत्ति अटैच, मेरठ समेत तीन संस्थान जांच के घेरे

Tue, 16 Jun 2026 01:00 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

एससी-एसटी छात्रों की पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति में कथित फर्जीवाड़े के मामले में ईडी ने मेरठ, हरिद्वार और रुड़की के तीन शिक्षण संस्थानों की 13.83 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की हैं। जांच में 2895 छात्रवृत्ति दावे फर्जी पाए गए हैं।
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छात्रवृत्ति। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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छात्रवृत्ति घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हरिद्वार, रुड़की और मेरठ के तीन शिक्षण संस्थानों की 13.83 करोड़ रुपये की चल व अचल संपत्तियों को अटैच किया है। ईडी का इस प्रकरण में यह छठा अटैचमेंट आदेश है। इससे पहले कई और शिक्षण संस्थानों की संपत्तियों को अटैच किया जा चुका है।

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छात्रवृत्ति राशि के दुरुपयोग का आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत जारी धनराशि के वितरण में कथित रूप से फर्जीवाड़ा किया गया। आरोप है कि पात्र छात्रों के नाम पर छात्रवृत्ति राशि का गलत तरीके से लाभ उठाया गया और सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ। इसी मामले में आर्थिक अनियमितताओं की जांच के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई की है।

मेरठ और उत्तराखंड के विश्वविद्यालय जांच के घेरे में
जांच के दौरान मेरठ स्थित एक निजी विश्वविद्यालय तथा उत्तराखंड की दो विश्वविद्यालयों का नाम सामने आया है। जांच एजेंसियां संबंधित दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल कर रही हैं। सूत्रों के अनुसार कुर्क की गई संपत्तियों का संबंध इसी कथित छात्रवृत्ति घोटाले से जोड़ा गया है।

ईडी ने मामले में पुलिस की जांच के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग के तहत जांच शुरू की थी। प्रवर्तन निदेशालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, जिन संस्थानों की संपत्तियां अटैच हुई हैं, उनमें रुड़की का एक, हरिद्वार का एक और मेरठ का एक इंस्टीट्यूट शामिल है।

इन्होंने अपने प्रबंधन व संबद्ध समितियों/ट्रस्टों के साथ मिलकर अपात्र और सत्यापित न किए जा सकने वाले विद्यार्थियों को लाभार्थी दर्शाकर समाज कल्याण विभाग की ओर से जारी छात्रवृत्ति की राशि धोखाधड़ी से हड़पी है।

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जांच में पाया गया कि इन तीनों संस्थानों ने कुल 6208 छात्रवृत्ति दावों को हरिद्वार जिला समाज कल्याण अधिकारी के सामने प्रस्तुत किया था। इस पर इन्हें लगभग 27.98 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति धनराशि वितरित की गई। कुल राशि में से लगभग 19.74 करोड़ रुपये सीधे संस्थानों के बैंक खातों में जमा किए गए जबकि लगभग 8.24 करोड़ रुपये विद्यार्थियों के नाम से संचालित बैंक खातों में जमा किए गए।

ईडी की जांच में आया कि ऐसे विद्यार्थियों के दावे प्रस्तुत किए गए जो कि नामांकित ही नहीं थे। बहुत से छात्र कक्षाओं में उपस्थित नहीं होते थे और कई शैक्षणिक रूप से अपात्र थे। यही नहीं बहुत से लाभार्थी या तो परीक्षाओं में असफल रहे या अनुपस्थित रहे। विवि रिकॉर्ड में उनका कुछ पता नहीं चला। बावजूद इसके इन्हें छात्रवृत्ति जारी होती रही। जांच में कुल 6208 छात्रवृत्ति दावों में से 2895 फर्जी थे।

इस तरह रहा फर्जी दावों का विवरण
अनुपस्थित छात्र
-668
असफल छात्र-84
विवि में नामांकन ही नहीं-1662
विवि से संबंधित पाठ्यक्रम नहीं-47
डुप्लीकेट विद्यार्थी-434

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