मेरठ नाड़ी वैद्य ताराचंद शर्मा ने बताया कि सेहतमंद रहना है तो मोटा अनाज (जौ, ज्वार, बाजरा, रागी और मक्का आदि) खाएं। गेहूं, चावल और मीठे से दूरी बनाएं।
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में चल रहे आयुर्वेद महासम्मेलन में तीसरे और अंतिम दिन सोमवार को आयुर्वेदिक चिकित्सकों अपने अनुभव और आयुर्वेद चिकित्सा के बारे में बताया। दिल्ली से आए वैद्य ताराचंद शर्मा आयुर्वेद पर 12 किताबें लिख चुके हैं। दिल्ली सरकार उन्हें आयुर्वेद पर लाइफ टाइम अचीवमेंट अवाॅर्ड दे चुकी है। उन्होंने बताया कि पहले अनाज को धोकर सुखाया जाता था, उसके बाद मोटा गेहूं पीसकर खाया जाता था।
यह भी पढ़ें: Bijnor News: अफजलगढ़ पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, कपिल गुर्जर के आवास पर भी जाएंगे
अब गेहूं को धोया नहीं जाता, बारीक पीसा जाता है, उसकी गर्मी खत्म नहीं होती, जिससे मधुमेह जैसी बीमारियां हो रही हैं। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन से आयुर्वेद को बढ़ावा मिलेगा। यह विश्व में फैलेगा। स्वस्थ रहें, मोटे न हों। गेहूं और चावल खाने से मोटे होते हैं, सेहतमंद नहीं। गाय का दूध पिए और तन मन को प्रसन्न रखें। व्यायाम करें।
आयुर्वेद महासम्मेलन के अंतिम दिन आयुर्वेदिक चिकित्सकों ने 500 से ज्यादा मरीजों को परामर्श दिया। सुभाष चंद्र बोस प्रेक्षागृह में वैज्ञानिक सत्र में आयुर्वेद के छात्र-छात्राओं को आयुर्वेद से संबंधित जानकारी दी गई। सुवर्ण प्राशन पर शोध पत्र प्रस्तुत किया गया। आयुर्वेदाचार्यों ने अपने अनुभव साझा किए।