कोणार्क कॉलोनी, सनसिटी, अंसल कोट्यार्ड, मेरठ वन कॉलोनी समेत मल्टी स्टोरी इलाकों के लोग अपने फ्लैट्स से निकलकर मैदानों में पहुंच गए। रजनीश कुमार, ओमपाल गुर्जर, और आकाश प्रधान जैसे स्थानीय निवासियों ने बताया कि पिछले कई वर्षों में इतने तेज झटके उन्होंने कभी नहीं महसूस किए।
हर कॉलोनी, हर गली, हर मोहल्ले में एक ही दृश्य देखने को मिला। लोग सड़कों पर खड़े होकर कह रहे थे कि अगर कुछ सेकंड और रहता, तो मकान गिर सकते थे।
भूकंप की तीव्रता और झटकों की अवधि ने लोगों को डरा दिया। गांव से लेकर शहर तक, हर किसी ने इसे महसूस किया। विशेषज्ञों ने चेताया कि लगातार ऐसे झटके आना खतरे की घंटी हो सकते हैं।
क्या कहते हैं वैज्ञानिक
सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. यूपी शाही ने बताया कि एक बड़े झटके के बाद कई हल्के झटके आ सकते हैं। मेरठ सिस्मिक जोन 4 और 5 में आता है, जहां भूकंप की संभावनाएं अधिक रहती हैं। प्लेट टैक्टोनिक सिद्धांत के अनुसार, पृथ्वी की प्लेट्स लगातार हिलती रहती हैं, जिससे ऐसी घटनाएं होती हैं।
लोगों ने राहत की सांस ली कि इसका केंद्र गहराई में था और इससे कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन डर अब भी कायम है।