फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Meerut News: ई-रजिस्ट्री को बताया काला कानून, आंदोलन और तेज करने की चेतावनी

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
- 12वें दिन भी रजिस्ट्री कार्यालय पर तालाबंदी, अधिवक्ता व दस्तावेज लेखक हड़ताल पर रहे
फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। प्रदेश सरकार द्वारा लागू की जा रही ई-रजिस्ट्री व्यवस्था के विरोध में अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों और स्टांप वेंडरों का आंदोलन 12 वें दिन भी जारी रहा। रजिस्ट्री कार्यालय पर तालाबंदी रखते हुए सभी संबंधित वर्गों ने कार्य बहिष्कार किया।
मेरठ बार एसोसिएशन के तत्वावधान में सोमवार को दाताराम सिंघल पुस्तकालय सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में मेरठ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनुज शर्मा, महामंत्री परवेज आलम, जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रविंद्र सिंह, महामंत्री प्रशांत गुप्ता तथा उत्तर प्रदेश दस्तावेज लेखक एसोसिएशन के प्रदेश संरक्षक संजय गुप्ता सहित विभिन्न जनपदों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
विज्ञापन

महामंत्री परवेज आलम ने प्रेस वार्ता में कहा कि प्रदेश भर में रजिस्ट्री कार्य से जुड़े अधिवक्ता और दस्तावेज लेखक हड़ताल पर हैं। केंद्रीय संघर्ष समिति से जुड़े 22 जनपदों में रजिस्ट्री कार्य पूरी तरह ठप है। चेतावनी दी कि जब तक ई-रजिस्ट्री व्यवस्था वापस नहीं ली जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा और रजिस्ट्री कार्य नहीं किया जाएगा।
वक्ताओं ने एक स्वर में ई-रजिस्ट्री व्यवस्था को सरकार द्वारा थोपे जा रहे काला कानून की संज्ञा देते हुए इसकी निंदा की। सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि व्यवस्था वापस होने तक रजिस्ट्री कार्यालयों पर तालाबंदी जारी रहेगी।
मेरठ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनुज शर्मा ने कहा कि दस्तावेज लेखन अत्यंत तकनीकी एवं अनुभव आधारित कार्य है, जिसे किसी निजी संस्था के माध्यम से प्रभावी ढंग से नहीं कराया जा सकता। यदि यह कार्य निजी हाथों में सौंपा गया तो त्रुटियों और विवादों की संभावना बढ़ जाएगी।
जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रविंद्र सिंह एवं महामंत्री प्रशांत गुप्ता ने कहा कि नई व्यवस्था लागू करने के बजाय मौजूदा प्रणाली को बेहतर बनाया जाना चाहिए। संजय गुप्ता ने बताया कि मेरठ में रजिस्ट्री कार्य से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग एक हजार से भी ज्यादा लोग जुड़े हुए हैं। यदि यह कार्य निजी संस्था को सौंपा गया तो हजारों लोगों के रोजगार पर संकट खड़ा हो जाएगा और उनके परिवार के सामने संकट की स्थिति होगी।
दस्तोवेज लेखक संगठन के अध्यक्ष नवीन शर्मा ने कहा कि दस्तावेज लेखन का कार्य वर्षों के अनुभव और विधिक समझ पर आधारित है। कई लोग पिछले 40 से 50 वर्षों से यह कार्य कर रहे हैं। किसी निजी संस्था को इसका विकल्प नहीं माना जा सकता।
विज्ञापन


प्रेस वार्ता में एडवोकेट विनोद राणा, वसीम, राघव शर्मा, सुनील शर्मा, धर्मपाल, अर्जुन गोयल, इशांत गर्ग सहित गाजियाबाद, लोनी, बुलंदशहर, बिजनौर, हापुड़ सहित विभिन्न जनपदों के दस्तावेज लेखक संगठनों के पदाधिकारी एवं अधिवक्ता उपस्थित रहे।
-
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें