मेडिकल कॉलेज में लगातार दूसरे दिन भी हड़ताल रही। इससे स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। जूनियर डॉक्टरों ने सुबह जबरदस्ती ओपीडी बंद करा दी। मरीजों को भी भगा दिया। प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। हड़ताल के कारण इमरजेंसी के अधिकांश बेड खाली हो गए हैं।
यूपीपीजीएमईई काउंसिलिंग में प्रांतीय चिकित्सा संवर्ग के चिकित्सक को 30 फीसदी तक की वेटेज देने के विरोध में जूनियर डॉक्टर और एमबीबीएस के छात्र हड़ताल पर हैं। लेकिन इनके विरोध का तरीका मरीजों की जान पर भारी पड़ रहा है।
जूनियर डॉक्टर सीनियर चिकित्सकों को भी ओपीडी नहीं खोलने दे रहे हैं। बुधवार सुबह जूनियर डॉक्टर पर्चा काउंटर पर धरना देकर बैठ गए। उन्होंने काउंटर खुलने ही नहीं दिया। जैसे ही कुछ सीनियर चिकित्सकों ने ओपीडी खोली तो उन पर वहां से जाने का दबाव बनाया। मरीज हाथ जोड़कर मन्नत करते रहे, लेकिन जूनियर डॉक्टरों ने एक न सुनी और ओपीडी बंद करा दी। आर्थो, मेडिसन, हार्ट, ईएनटी से लेकर दांत रोग तक की ओपीडी बंद पड़ी रही।
मरीजों ने विरोध जताया
दूसरे दिन भी इलाज न मिलने के कारण कुछ मरीजों ने हड़ताल का विरोध किया। लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं था। मजबूरी में मरीजों को बिना इलाज के ही लौटना पड़ा।
इमरजेंसी के मरीजों की हो रही छुट्टी
कहने को हड़ताल के बीच इमरजेंसी सेवा को चालू रखा गया है, लेकिन दो दिन की हड़ताल के बीच इमरजेंसी पूरी तरह से खाली हो चुकी है। एक दो गंभीर मरीज को जरूर भर्ती किया गया है। कुछ मरीज स्वयं ही छुट्टी लेकर चले गए हैं।
पूरी मौज में कर्मचारी
जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल का फायदा अन्य स्टाफ भी उठा रहा है। इमरजेंसी से वार्ड ब्वॉय गायब हैं। अगर कोई भी इमरजेंसी केस आता है तो उसे न तो स्ट्रेचर दिया जा रहा है और न ही व्हीलचेयर। तीमारदार खुद मरीज को गोद में उठाकर ले जा रहे हैं।
दूसरे वार्ड भी हुए खाली
हड़ताल का असर अन्य वार्डों में भी पड़ रहा है। वार्डों में भी जूनियर डॉक्टर काम नहीं कर रहे हैं, जिससे मरीजों को देखने वाला कोई नहीं है। दो दिनों में करीब डेढ़ सौ से अधिक मरीज डिसचार्ज होकर चल गए हैं, जिसके बाद भर्ती मरीजों की संख्या 300 से भी नीचे रह गई है।
छुुट्टियां हुईं रद्द
हड़ताल के कारण कॉलेज प्रशासन ने स्टाफ और सीनियर चिकित्सकों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं। बुधवार को प्राचार्य डॉक्टर केके गुप्ता ने सीनियर फैकल्टी मेंबर को निर्देश दिया कि वो वार्डों में भर्ती मरीजों का सही तरीके से ट्रीटमेंट सुनिश्चित कराएं।