सुबह 11:00 बजे का वक्त। नगर निगम में माह के दूसरे शनिवार का अवकाश। निर्माण विभाग के जेई सेक्शन के एक कमरे में शराब की महफिल सजी है। सरकारी कार्यालय में ही तीन कर्मचारी शराब और मुर्गे की दावत उड़ा रहे हैं। तभी सूचना पर अमर उजाला संवाददाता वहां पहुंचता है तो कैमरा चलते ही कर्मचारियों में भगदड़ मच जाती है। कर्मचारी शराब और बीयर की बोतल लेकर भाग खड़े होते हैं।
यह नजारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सरकारी महकमों में सुधार के प्रयासों को केवल हवा में ही नहीं उड़ाता, बल्कि निगम के आला अधिकारियों को भी आइना दिखाता है। मुख्यमंत्री ने सरकारी कार्यालयों में साफ सफाई के साथ ही धूम्रपान और गुटखे आदि पर रोक लगा रखी है। उनका सपना है कि सरकारी कार्यालय मॉडल के रूप में बनें। लेकिन यहां तो कर्मचारियों ने सरकारी कार्यालयों को मयखाना तक बना दिया है।
यह पहली बार नहीं
नगर निगम कैंपस में रहने वाले निगम कर्मचारियों के परिवार वालों का कहना है कि नगर निगम में मयखाना बनाए जाने का यह पहला मामला नहीं है। यहां तो सरकारी कार्यालयों में दिन छिपते ही शराब और मांस का सेवन करने के साथ ही जुआ, सट्टा तक खेला जाता है। कई बार कर्मचारियों के परिवार वाले इसका विरोध कर चुके हैं। लेकिन किसी अधिकारी ने इस पर कार्रवाई करने की जहमत नहीं उठाई। कहने को निगम परिसर में हर समय सुरक्षा गार्ड तैनात रहते हैं। लेकिन इसके बावजूद निगम में सरकारी कर्मचारियों के साथ असामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता है।