बंगला नंबर 210बी आरआर मॉल की दुकानों के ध्वस्तीकरण के बाद अब कैंट बोर्ड बंगला परिसर में बनी कोठियों और दूसरे निर्माणों को भी ध्वस्त करेगा। इस मामले मेें सीईओ आलोक गुप्ता ने सोमवार को स्पष्ट कर दिया कि ये सब अवैध हैं। किसी को छोड़ा नहीं जाएगा।
सीईओ ने दुकानों के ध्वस्तीकरण अभियान के पूरा होने के बाद पत्रकारों से बातचीत में बताया कि अवैध निर्माण करने वालों पर जरा भी नरमी नहीं बरती जाएगी। बंगला नंबर 210बी परिसर में बनी कोठियों को भी जल्द ध्वस्त करने के लिए प्लानिंग बनाई जाएगी।
बता दें कि बंगले में 62 भवन बने हैं। ऐसे में सबकी इसी पर निगाह पर है। इस मामले को लेकर जल्द ही कैंट बोर्ड उपाध्यक्ष बीना वाधवा और सांसद की रक्षा मंत्री से बैठक प्रस्तावित है। 30 अप्रैल को प्रस्तावित इस बैठक में संबंधित सांसदों के अलावा देश की 62 कैंट बोर्डों के उपाध्यक्ष शामिल होंगे। इसमें कैंट एक्ट और लैंड पॉलिसी को लेकर चर्चा हो सकती है।
पिछली घटना से लिया कैंट बोर्ड ने सबक
9 जुलाई 2016 को आरआर मॉल के ध्वस्तीकरण के दौरान चार लोगों की मलबे में दबकर मौत हो गई थी। सोमवार को दुकानों के ध्वस्तीकरण को लेकर इस बार कैंट बोर्ड ने सबक लिया। पुलिसकर्मियों द्वारा धरनारत व्यापारियों को दुकानों से हटाने के बाद कैंट बोर्ड की एक टीम ने सारी दुकानों में और छतों पर जाकर सर्च किया। टीम ने जब इशारा कर दिया कि कार्रवाई शुरू कर दो तो जेसीबी मशीनें लगा दी गईं। इस दौरान कैंट बोर्ड सीईओ आलोक गुप्ता और सीईई अनुज सिंह टीमों को निर्देशित करते रहे। कैंट बोर्ड की जेसीबी को निर्माण तोड़ने में समय लगा तो सीईई ने एमडीए से भी एक जेसीबी मंगवा ली। यहां पड़े मलबे को दो सप्ताह के भीतर उठाने की कवायद है। 210बी की दुकानों के बराबर में बाद में बनाई गईं महादेव एसोसिएट्स की दुकानें भी ध्वस्त कर दी गई हैं।
परिवार बिलखता रहा, नहीं आया कोई नेता या व्यापारी
मेरठ। दुकानों के ध्वस्तीकरण के दौरान दुकानदारों के परिजन आंसू बहाते रहे। लेकिन उनको ढांढस बंधाने के लिए भी कोई नेता या व्यापारी मौके पर नहीं पहुंचा। कुछ लोगों का कहना था कि व्यापारियों से रात में ही पुलिस-प्रशासनिक अफसरों ने बात कर ली थी। अफसरों ने सबको दबाव में ले लिया था कि अगर कार्रवाई में अड़ंगा लगाया तो गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा। हाईकोर्ट की अवमानना के मामले में भी कार्रवाई होगी।
जिसने बनाया अवैध मॉल, वो अब जमानत पर बाहर
मेरठ। बंगला नंबर 210बी स्थित कोठी में रहने वाले बिल्डर आनंद प्रकाश अग्रवाल ने इस जमीन पर आरआर मॉल का निर्माण कराया था। सन 1994 में कैंट बोर्ड ने यहां निर्माण को अवैध मानते हुए बिल्डर को ध्वस्तीकरण का नोटिस दिया। इस मामले में सिविल कोर्ट ने भी कैंट बोर्ड के पक्ष में फैसला सुनाया। बिल्डर ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की तो स्टे मिल गया।
इसके बाद कैंट बोर्ड ने फिर से वाद दायर किया। पूरे मामले में हाईकोर्ट के एडवोकेट कमीशन ने वर्ष 2008 में मौके का निरीक्षण करते हुए निर्माण को अवैध माना। सन 2014 में हाईकोर्ट ने निर्माण का ध्वस्तीकरण करने और बिल्डर को सजा सुनाई। इसके बाद सन 2015 में रजिस्ट्री विभाग ने 53 रजिस्ट्री निरस्त कर दीं। इसके बाद नौ जुलाई 2016 को कैंट बोर्ड ने मॉल की तीन मंजिल ध्वस्त कर दीं। जिसमें चार लोगों की मौत हो गई। इस मामले में बिल्डर आनंद प्रकाश अग्रवाल को जेल भेजा गया। लेकिन जिस आनंद प्रकाश ने लोगों की गाढ़ी कमाई लेकर दुकानें बेचीं वो फिलहाल जमानत पर बाहर है।