मेरठ न्यूज
- फोटो : अमर उजाला
पीड़िता महिला अधिवक्ता का इस पूरे प्रकरण पर आरोप लगाते हुए कहना है कि पुलिस सत्ताधारी नेताओं के दबाव में केस कमजोर करने में लगी है। साक्ष्य भी मिटाने का समय दिया जा रहा है। 164 सीआरपीसी के बयान तक नहीं कराए। होटल मालिक के साथ कई युवक और होटल में थे, जिन्होंने गुंडागर्दी की। दरोगा मेरे केस के विवेचक थे। होटल में खाना खाने या फिर कॉफी के लिए ऑर्डर देना अपराध नहीं था। वेटर से विवाद के बाद मेरा मोबाइल छीना गया। मैं गुस्से में आ गई थी तो होटल मालिक ने होटल के गेट बंद करा दिए। मेरे साथ लूटपाट, छेड़छाड़ की गई। एक महिला होने के नाते मैंने अपने बचाव में होटल में प्लेट फेंकी थी। पुलिस उन लोगों को भी गिरफ्तार करे, जिन्होंने मेरे व दरोगा के साथ होटल में गुंडागर्दी की है।