तैयारियां अधूरी, पूरी तरह शुरू होगा ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट
मेरठ। परिवहन विभाग ने साकेत में बने ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट को आधी अधूरी तैयारियों के साथ पूरी तरह से शुरू करने की तैयारी कर ली है। कार्यदायी संस्था पैकफेड से सोमवार को इंस्टीट्यूट की हस्तांतरण प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्थायी डीएल का पूरा सिस्टम यहां शिफ्ट कर दिया जाएगा। बुधवार से स्थायी लाइसेंस के लिए अभ्यर्थियों को यहीं पर टेस्ट देना होगा। हालांकि विभाग में दो के मुुकाबले एक ही आरआई तैनात होने से इस प्रक्रिया पर सवालिया निशान लग रहे हैं। एक आरआई कैसे दो जगह काम कर सकता है।
ड्राइविंग लाइसेंस और वाहनों की फिटनेस प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग ने साकेत आईटीआई में 4.50 करोड़ रुपये की लागत से ऑटोमेटिक ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट का निर्माण पैकफेड से कराया है। संस्था ने अपने हिस्से आया भवन और फर्नीचर का काम पूरा कर दिया है, लेकिन ऑटोमेटिक ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक का काम अभी अधूरा है। इसका ट्रैक तो तैयार है, लेकिन इस पर लगने वाले सेंसर और कैमरे अभी तक नहीं लग सके हैं। सेंसर और कैमरों की कनेक्टिविटी कंप्यूटर सिस्टम से होनी है। इसके बाद ही यहां पर ड्राइविंग टेस्ट देने वाले अभ्यर्थी पारदर्शिता के साथ स्थायी लाइसेंस के लिए पास हो सकेंगे। लेकिन अधूरी तैयारियां होने के बावजूद परिवहन विभाग ने इंस्टीट्यूट चालू करने का तुगलकी फरमान जारी कर दिया है।
60 सेंसर, 7 गलतियां ही होंगी माफ
ऑटोमेटिक ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक अंग्रेजी के आठ अक्षर की तरह बना हुआ है। इसमें हर डेढ़ मीटर पर एक सेंसर लगा है। इस पर कुल 60 सेंसर हैं। इसमें दोपहिया चलाने वालों को जमीन पर पैर नहीं रखना है। अगर कोई ऐसा करेगा तो उसे सेंसर पकड़ लेते हैं। 60 सेंसरों में सात बार की गई गलतियां माफ होती है, लेकिन आठवीं बार गलती करने और सेंसर छूते ही आवेदक फेल हो जाता है। अभ्यर्थी को इस टेस्ट को एक मिनट में पूरा करना होता है।
अभी मैनुअल टेस्ट से बनेंगे डीएल
जब तक ट्रैक पर सेंसर और कैमरे नहीं लगेंगे तब तक मैनुअल तरीके से ही अभ्यर्थियों का ड्राइविंग टेस्ट लिया जाएगा। एआरटीओ प्रशासन श्वेता वर्मा ने बताया कि मुख्यालय से जो आदेश मिला है उसका पालन किया जा रहा है। स्थायी डीएल की प्रक्रिया अब साकेत स्थित ऑटोमेटिक ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट से ही पूरी की जाएगी। लर्निंग लाइसेंस पहले की तरह आरटीओ से ही बनते रहेंगे।