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चालक को लगी झपकी, नौ जिंदगी हो गई खत्म, देखें तस्वीरें

Fri, 07 Jul 2017 01:23 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ बिजनौर/धामपुर

सार

रोडवेज बस से भिड़ी इनोवा, लखीमपुर के एक ही परिवार के आठ लोगों की मौत, बिजनौर में धामपुर के पास हुई भीषण दुर्घटना, कार चालक की भी मौत, हरिद्वार जा रहा था व्यवसायी का परिवार, चार लोग गंभीर रूप से घायल  
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हादसे के बाद इनोवा कार - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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विस्तार
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लखीमपुर खीरी से हरिद्वार जा रही इनोवा कार बृहस्पतिवार को सुबह करीब 5.30 बजे बिजनौर के धामपुर में गांव सुहागपुर के पास सामने से आ रही गढ़मुक्तेश्वर डिपो की रोडवेज बस से टकरा गई। इस भीषण हादसे में इनोवा कार में सवार एक ही परिवार के आठ सदस्यों व कार चालक की मौत हो गईं। चार लोग गंभीर रूप से घायल हैं। माना जा रहा है कि कार या बस के चालक को झपकी लग जाने के कारण यह हादसा हुआ।
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टंडन परिवार पर टूट पड़ा कहर

कार से शव निकालने का प्रयास करते लोग - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
इस भीषण हादसे का कहर लखीमपुर खीरी के मोहल्ला कपूरथला इमली चौक निवासी व्यवसायी अनिल टंडन के परिवार पर टूटा। अनिल टंडन के तीन बेटों में राहुल सबसे बड़े, रजत दूसरे नंबर के व रोहित सबसे छोटे थे। राहुल घर पर ही थे। अन्य दो भाई परिवार के अन्य सदस्यों को लेकर बुधवार रात हरिद्वार के लिए निकले थे। हादसे में रोहित टंडन (36), रजत (35), इनकी मां नीरू टंडन (60), राहुल टंडन की पत्नी सोना टंडन (38), बेटे कार्तिक टंडन (10), रजत टंडन की पत्नी शालू टंडन (32), बेटे हनू (8) व बेटी रिद्धि टंडन (8 माह) और छाऊच गांव निवासी इनोवा चालक सलाउद्दीन की मौके पर ही मौत हो गई। रोहित टंडन की पत्नी श्वेता टंडन (34), राहुल का पुत्र कान्हा टंडन (14), रोहित का पुत्र सक्षम (10), पुत्री पाखी टंडन (5) गंभीर रूप से घायल हो गए।

चालक बस चालू हालत में छोड़कर हुआ फरार

कार में फंसा मासूम का शव - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
हादसे के बाद चालक बस को चालू हालत में ही छोड़कर फरार हो गया। पुलिस ने बस बंद करने का प्रयास किया, लेकिन वह बंद नहीं हो पाई। बाद में पुलिस ने चालू हालत में ही बस को हाईवे से हटाकर किनारे कराया। हादसे के बाद पहुंची पुलिस और मौके पर इकट्ठा हुए लोगों ने क्षतिग्रस्त कार की खिड़की काटकर उसमें फंसे शवों और घायलों को किसी तरह से बाहर निकाला। हादसे के कारण नेशनल हाईवे-74 पर दोनों तरफ वाहनों का कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया। मौके पर पहुंचे राहुल टंडन ने बताया कि सभी लोग बुधवार रात करीब 11 बजे लखीमपुर खीरी से हरिद्वार के लिए चले थे और वहां से उन्हें देहरादून एक रिश्तेदार के यहां जाना था। अनिल कुमार टंडन प्रतिष्ठित कारोबारी हैं। उनकी फ्लोर मिल, राहुल मोटर्स समेत कई फर्में हैं। हादसे की खबर आते ही घर में कोहराम मच गया। बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ उनके आवास पर जुट गई। चीख पुकार सुनकर हर किसी की आंख नम थी। पूरे दिन उनके घर पर लोगों की भीड़ जुटी रही। शवों के शुक्रवार की भोर पहुंचने की संभावना है।  

  
       

जिसने हादसा के बारे में सुना, वही चल पड़ा    

व्यापारी के घर उमड़ी लोगों की भीड़ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
प्रतिष्ठित कारोबारी अनिल कुमार टंडन के परिवार के आठ सदस्यों की मौत की जानकारी शहर में आग की तरह फैल गई। जिसने सुना वही उनके घर की ओर चल पड़ा। तीन बेटों में से दो बेटों, बहुओं और पोते-पोतियों की मौत की मनहूस खबर ने सभी को झकझोर दिया। देखते ही देखते उनके रिश्तेदारों, पड़ोसियों की भीड़ जमा हो गई। पूरा शहर इस हादसे से कांप उठा है। कपूरथला मोहल्ले में मातमी सन्नाटा पसरा है। पूरे दिन बड़ी संख्या में लोग उनके घरों पर जुटे रहे। मोहल्ले के अधिकतर घरों में चूल्हे तक नहीं जले।      
 

व्यस्तता के कारण नहीं गए थे अनिल और राहुल    

व्यापारी के घर पहुंच लोग - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
काम की अधिकता और बिजनेस को लेकर अनिल कुमार टंडन और उनके बड़े पुत्र राहुल ने हरिद्वार घूमने जाने का इरादा त्याग दिया था। इससे पिता-पुत्र की जान बच गई। पुलिस ने कारोबारी के बेटे राहुल टंडन के मोबाइल पर कॉल कर सुबह हादसे की सूचना दी। हादसा सुनकर राहुल अवाक रह गए और दहाड़ें मारकर बिलख पड़े। उन्होंने पिता अनिल टंडल को घटना की जानकारी दी जिसे सुनते ही वह भी गश खा गए। चीखपुकार पर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और दोनों को किसी तरह से संभाला। उसके बाद राहुल अपने पिता व कुछ अन्य रिश्तेदारों के साथ घटनास्थल के लिए रवाना हो गए।

उस रास्ते मुड़ गए जहां इंतजार कर रही थी मौत

क्षतिग्रस्त रोडवेज बस
हरिद्वार जाने के लिए निकले लखीमपुर खीरी का टंडन परिवार उस जगह हादसे का शिकार हुआ, जो इनके रास्ते में पड़ता ही नहीं था। धामपुर से इनको हरिद्वार के लिए मुड़ना था, लेकिन यह दूसरी दिशा में शेरकोट व काशीपुर की ओर मुड़ गए और  गांव सुहागपुर के सामने उनकी कार सामने से आ रही बस से टकरा गई। नौ लोगों की मौत के बाद जमा हुए लोगों में परिवार के प्रति संवेदना थी तो साथ ही चर्चा भी थी कि काल वहीं खींचकर ले जाता है, जहां मौत लिखी होती है। यही इनके साथ भी हुआ, धामपुर से उस रास्ते पर मुड़ गए, जहां रास्ते में मौत इनका इंतजार कर रही थी। 
 

कई दिनों से हरिद्वार घूमने का बन रहा था कार्यक्रम 

मौके पर जेसीबी तक का इस्तेमाल हुआ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी के मोहल्ला कपूरथला के इमली चौराहा निवासी अनिल टंडन के तीन बेटों में राहुल सबसे बड़ा, रजत दूसरे नंबर का व रोहित सबसे छोटा था। लखीमपुर खीरी में टंडन परिवार का मारुति कार का शोरूम और आटा मिल है। शहर के बड़े कारोबारियों में इस परिवार की गिनती होती है। हादसे के वक्त राहुल घर पर ही था, बाकी दोनों भाई परिवार के सदस्यों को लेकर घर से निकले थे। आमने-सामने से जिस तरह दोनों वाहनों में भिड़ंत हुई उससे अनुमान लगाया जा रहा था कि ये लोग हरिद्वार से लौट रहे थे। लेकिन परिवारीजनों के आने के बाद पता चला कि ये लोग हरिद्वार जा रहे थे और बुधवार रात करीब 11 बजे लखीमपुर खीरी से हरिद्वार के लिए चले थे। लखीमीपुर खीरी से यह मुरादाबाद होते हुए धामपुर पहुंचे। धामपुर से इन्हें हरिद्वार के लिए मुड़ना था लेकिन यह गलत दिशा में मुड़ गए और चार-पांच किलोमीटर गलत दिशा में चले गए। सुबह का समय था और बारिश भी हो रही थी, इसके चलते किसी से रास्ता पता भी नहीं कर पाए होंगे। परिवारीजन उस घड़ी को कोस रहे हैं, जब ये लोग घूमने के लिए घर से निकले थे। राहुल के मुताबिक, कई दिनों से हरिद्वार घूमने का कार्यक्रम बन रहा था। हरिद्वार से सब लोग रिश्तेदारी में घूमने देहरादून जाते। बुधवार रात 11 बजे इन्नोवा में सवार होकर परिवार के सभी सदस्य खुशी-खुशी हरिद्वार जाने के लिए निकले थे।
 

चालक भटक गया था रास्ता

शव निकालने का प्रयास करते लोग
टंडन परिवार से जुड़े कुछ लोगों ने बताया कि परिवार हरिद्वार जाने के लिए लखीमपुर खीरी से वाया मुरादाबाद धामपुर पहुंचा था। यहां गाड़ी का चालक रास्ता भटक गया। काफी दूर जाने के बाद उसने किसी से हरिद्वार जाने का रास्ता पूछा। इसके बाद वह सही रास्ते जाने के लिए लौट रहा था, तभी हादसा हो गया। कार में फंसे शव खिड़की को कटर से काटने के बाद भी नहीं निकले तो पुलिस ने जेसीबी का सहारा लिया। हादसे के बाद हाईवे 74 पर दोनों तरफ कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया। पुलिस ने यातायात सुचारु करने के लिए डायल 100 गाड़ियों के स्टाफ को लगा रखा था। यातायात सुचारु रखने के लिए लाउडस्पीकर का भी उपयोग किया गया। जाम में वाहनों के फंसने से कई स्कूलों के बच्चे और शिक्षक देरी से पहुंचे। एसएसपी देहात दिनेश सिंह और एसडीएम वीके सिंह ने घटनास्थल पर पहुंचकर राहत कार्य का जायजा लिया।

सीट के नीचे मिला परी का शव

घायल महिला - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
एक साल की परी का शव सीट के नीचे से उस समय मिला, जब पुलिस कार की तलाशी ले रही थी। गौरतलब है कि 29 जून को शेरकोट में स्कॉर्पियों कार में सवार रुड़की के सात लोगों की मौत हो गई थी। ये सभी कार से काशीपुर से एक विवाह समारोह में शामिल होने के बाद लौट रहे थे।

 

कार में बिखरी थी बच्चों के खाने-पीने की सामग्री 

घायल मासूम - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
क्षतिग्रस्त कार में बच्चों के खाने के बिस्किट, ब्रेड, पानी की बोतेलें, आटा, बर्तन बिखरे पड़े थे। पुलिस ने घटनास्थल से मिले फोन के माध्यम से परिजनों को हादसे की सूचना दी तो उनके नाम पता चले।

 

डीएम-एसपी पहुंचे अस्पताल

डीएम और एसएसपी पहुंचे अस्पताल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
डीएम जगतराज व एसपी अतुल शर्मा ने जिला अस्पताल पहुंचकर घायलों को देखा। प्राथमिक उपचार के बाद सभी घायलों को आधुनिक आपातकालीन जीवन सुरक्षा सेवाओं से लेस 108-एंबुलेंस से मेरठ के आनंद अस्पताल भेजा गया। डीएम ने घायलों के उचित उपचार और देखरेख के लिए मेरठ के डीएम से फोन पर बातचीत की। फोन से ही मेरठ के सीएमओ को निर्देश दिए कि वह आनंद अस्पताल में जाकर अपनी देखरेख में घायलों का उपचार कराएं। टंडन परिवार के बिजनौर निवासी रिश्तेदार भी सूचना पर पहुंचे और डीएम का आभार जताया।

 

दुर्घटनास्थल का मंजर देख कांप उठा कलेजा

घायल मासूम - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
दुर्घटनास्थल का मंजर देख लोगों का कलेजा कांप गया। वहां लाशें खून से लथपथ थीं। हर ओर मृतकों और घायलों का खून बिखरा हुआ था। खून से लथपथ लाशों के बीच बच्चे दर्द से कराह रहे थे। एक साल की मासूम परी का रक्त से नहाया शव देकर लोगों की रूह सिहर उठी। एक तरफ कार से घायल बच्चों के रोने और कराहने की आवाजें आ रही थीं तो दूसरी ओर मरघट जैसा सन्नाटा था। एक के बाद एक कार से नौ शव बाहर निकाले गए। हादसे के बाद बस का चालक बस को बंद किए बिना ही फरार हो गया। इनोवा कार की अगली सीट पर ड्राइवर के बराबर में एक वर्षीय परी पापा रजत की गोद में थी। हादसे की खबर सुनकर हर कोई स्तब्ध रह गया।
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झपकी ने मौत के आगोश में पहुंचाया

ड्राइवर का शव निकालते लोग - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
हादसा सवेरे साढ़े पांच बजे के आसपास का बताया गया है। उस समय हाईवे पर इक्का-दुक्का वाहन ही चलते हैं। अंदाजा लगाया जा रहा है कि वाहनों की रफ्तार काफी तेज रही होगी। इसी दौरान दोनों वाहनों में से किसी के चालक को झपकी लगी और नौ लोग मौत के आगोश में समा गए। कार में फंसे शव खिड़की को कटर से काटने के बाद भी नहीं निकले तो पुलिस ने जेसीबी का सहारा लिया। हादसे के बाद हाईवे 74 पर दोनों तरफ कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया। पुलिस ने यातायात सुचारु करने के लिए डायल 100 गाड़ियों के स्टाफ को लगा रखा था। यातायात सुचारु रखने के लिए लाउडस्पीकर का भी उपयोग किया गया। जाम में वाहनों के फंसने से कई स्कूलों के बच्चे और शिक्षक देरी से पहुंचे। एसएसपी देहात दिनेश सिंह और एसडीएम वीके सिंह ने घटनास्थल पर पहुंचकर राहत कार्य का जायजा लिया।
 
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