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तीन तलाक पर सजा का मसौदा कानून हरगिज कबूल नहीं : मौलाना

Fri, 12 Jan 2018 09:11 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
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देवबंद
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जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय सचिव मौलाना महमूद मदनी ने तीन तलाक पर तीन साल की सजा वाले लोकसभा में पेश किए गए बिल पर कहा कि इस कानून के पीछे मुसलमानों पर किसी न किसी तरह यूनिफार्म सिविल कोड थोपने का प्रयास किया जा रहा है। इसका उद्देश्य मुस्लिम महिलाओं के इंसाफ के बजाए मुसलमानों को धार्मिक स्वतंत्रता से वंचित करना है। 

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शुक्रवार को मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि तीन तलाक मसले पर सजा का जो मसौदा कानून है वह मुस्लिम तलाकशुदा महिला के साथ न्याय नहीं करता है। बल्कि इससे सख्त अन्याय की आशंका है। इसलिए इसे हरगिज कबूल नहीं किया जा सकता। इस कानून के तहत पीड़ित महिला का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। जबकि पुरुष के जेल जाने की सजा महिला और बच्चों को भुगतनी पड़ेगी। इतना ही नहीं जिन लोगों के लिए यह कानून बनाया गया उनके प्रतिनिधियों, धार्मिक चिंतकों, विभिन्न शरीयत के कानूनी विशेषज्ञों और मुस्लिम संगठनों से कोई सुझाव नहीं लिए गए। उन्हें कानून के दायरे से बाहर रखा गया। मौलाना मदनी ने कहा कि सरकार हठधर्मी का रवैया अपनाते हुए इंसाफ और जनता की राय को रौंदने पर आमादा नजर आ रही है। जो किसी भी लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि हम मानते हैं कि इस कानून के पीछे मुसलमानों पर किसी न किसी तरह यूनिफार्म सिविल कोड थोपने का प्रयास किया जा रहा है और इसका उद्देश्य मुस्लिम महिलाओं के इंसाफ के बजाए मुसलमानों को धार्मिक स्वतंत्रता से वंचित करना है, लेकिन भारतीय संविधान में दिए गए अधिकारों के तहत मुसलमानों के धार्मिक और पारिवारिक मामलों में अदालतों व संसद को हस्तक्षेप करने का अधिकार हरगिज नहीं है। इसलिए अगर संसद कोई ऐसा कानून बनाएगी या भारत सरकार द्वारा ऐसा कोई अध्यादेश लाया जाए जो धार्मिक कानून में हस्तक्षेप करता है वह मुसलमानों के लिए हरगिज कबूल नहीं होगा। उन्होंने कहा कि मुसलमान हर सूरत में शरीयत कानून का पालन करना अपना कर्तव्य समझता है और पालन करता रहेगा। उन्होंने सभी मुसलमानों से अपील की है कि वे तलाक-ए-बिद्दत से पूरी तरह ऐतराज करें और शरीयत के हुक्म के मुताबिक निकाह, तलाक और अन्य पारिवारिक मामलों को तय करें। ताकि इस बहाने से सरकारों को हस्तक्षेप करने का मौका न मिल सके। उन्होंने कहा कि सरकार मुसलमानों पर शरीयत के खिलाफ कानून हरगिज न थोपें। सरकार जिस तरह का रवैया अपना रही है वह वास्तव में लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन है।
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