भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी का कहना है दादरी कांड के बाद जो साहित्यकार पुरस्कार लौटा रहे हैं, वे पुरस्कार के लायक ही नहीं हैं।
इन साहित्यकारों को न भाजपा की सरकार में पुरस्कार दिया गया है और न ही भाजपा ऐसे लोगों को कभी पुरस्कार देगी। उन्होंने साहित्यकारों पर सामाजिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया।
पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने दादरी के इकलाख हत्याकांड के लिए यूपी सरकार को कठघरे में खड़ा किया। कहा कि अखिलेश सरकार ने जो रिपोर्ट भेजी है, उसमें कहीं भी इसका जिक्र नहीं है कि वारदात के लिए कोई संगठन जिम्मेदार है या यह सुनियोजित था।
आरोप लगाया प्रदेश सरकार नाच-गाने में व्यस्त है। साहित्यकारों के पुरस्कार लौटाने के सवाल पर उन्होंने कहा ऐसा करने वाले साहित्यकार पुरस्कार के लायक नहीं हैं। देश में गोहत्या पर हो रहे बवाल पर कहा कि संविधान की धारा-48 में गोहत्या को निषेध घोषित किया गया है।
फरीदाबाद में दलित की हत्या के मामले पर उन्होंने कहा वह मामले की जांच करा रहे हैं। देश में सांप्रदायिकता का माहौल अंग्रेज बनाकर गए थे। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के लिए कहा कि वह सोनिया गांधी का आर्डर मानते थे। नेताजी की मौत के रहस्य के बारे में कहा कि 23 जनवरी को फाइल खुलने पर यह सामने आ जाएगा। राष्ट्रगान के कुछ शब्दों को लेकर उठ रहे विवाद पर उन्होंने कहा पूर्व राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने संविधान लागू करते समय वचन दिया था कि जरूरत के हिसाब से राष्ट्रगान के शब्दों में परिवर्तन किया जाएगा। ऐसे में अधिनायक जैसे शब्द हटा देने चाहिए।