बिजनौर। गंगा नदी पर साल 1984 में बैराज को बनाया गया था। तब से अब तक बिजनौर बैराज का पुल 41 सालों से दिल्ली और मेरठ को से बिजनौर को सड़क से जोड़े हुए है। खास बात यह है कि पुल एक ही है, लेकिन इसका जिम्मा संभालने वाले विभागों की अदला बदली होती रही। इस बीच इस पुल की डीपीआर कहीं गुम हो गई। अब खराबी को लेकर डीपीआर की जरूरत पड़ी तो कहीं मिल नहीं रही है।
फिलहाल बिजनौर बैराज पुल पर यातायात बंद है। सिर्फ पैदल चलने वाले और बाइक सवार ही पुल के जरिए गंगा नदी को पार कर रहे हैं। पैदल निकलने वालों की भीड़ यह बताने के लिए काफी है कि इस पुल कि अहमियत कितनी है।
यह पुल बिजनौर ही नहीं बल्कि गढ़वाल के बाशिंदों के लिए भी लाइफ लाइन से कम नहीं है। अब पुल पर आवाजाही बंद हुई तो मरम्मत के लिए इसकी कुंडली भी खंगाली जाने लगी। पुल की डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) में क्षमता से लेकर निर्माण का तरीका, यानि हर तरह की जानकारी होती है।
अब पुल में खराबी के बाद इसकी डीपीआर को तलाशा गया। नेशनल हाईवे के अधिकारियों ने इसकी डीपीआर देखनी चाही। मगर मिली नहीं। बताया गया कि यह पुल पहले लोक निर्माण विभाग के अधीन हुआ करता था, इसके बाद कुछ सालों तक लोक निर्माण विभाग गाजियाबाद के भी हवाले रहा, साथ ही सिंचाई विभाग ने भी देखरेख का जिम्मा संभाला था। कुल मिलाकर पुल कई विभागों के अधीन रहा। ऐसे में इसकी डीपीआर किस विभाग की अलमारी में पड़ी रह गई यह किसी को मालूम नहीं है।
साल 2019 में भी बंद हुआ था बैराज
साल 2019 में गेट नंबर 14-15 के बीच स्लैब दरकने की वजह से बैराज को यातायात के लिए बंद किया गया था। करीब दो महीना बंद रहने के बाद स्लैब के आधे हिस्से को तोड़कर फिर से बनाया गया था, तब कहीं जाकर बैराज का पुल यातायात के लिए चालू हो सका था।