इस सनसनीखेज डबल मर्डर में परतापुर पुलिस ने आधी अधूरी विवेचना कर जेल भेजे आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट 21 अप्रैल 2018 को सीजेएम कोर्ट में दाखिल की। इस केस के अहम साक्ष्य सीसीटीवी कैमरे की फुटेज की सीडी भी चार्जशीट के साथ लगाई गई। लेकिन सरेआम गोलियां बरसाने वाले तीसरे हत्यारे का पुलिस ने चार्जशीट में जिक्र तक नहीं किया। इस पर मामला कमजोर हो सकता है।
केस में क्यों पिछड़ रही पुलिस
इस वारदात में मेरठ पुलिस शुरूआत से पिछड़ती रही। पुलिस एक भी हत्यारोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकी। तीन आरोपियों ने मां-बेटे की सरेआम हत्या की। इसके पुख्ता सुबूत भी पुलिस के पास हैं। हत्यारोपी मांगे उर्फ विनय दिल्ली में जाकर सेटिंग कर आर्म्स एक्ट में बंद हो गया। दूसरे हत्यारोपी विकास जाट को मुजफ्फरनगर पुलिस ने एनकाउंटर में ढेर कर दिया। तीसरे का अभी पता नहीं। मांगे को रिमांड पर लेकर पुलिस ने मुकदमा चलाने की भरपाई ही की है।
बेटे वीर को कैसे भेजूं स्कूल
इस घर में अब भोलू की पत्नी कंचन पांच साल के बेटे वीर और छह साल की बेटी परी के साथ रहती है। उनका मकान भी गांव के बाहर जंगल से सटा है। सुरक्षा में घर के बाहर पीएसी का कैंप लगा है। लेकिन कंचन बेटे को स्कूल भेजने की हिम्मत नहीं जुटा रही। वह कहती है कि तीसरा हत्यारोपी अभी फरार है। ससुर, सास और पति को खो चुकी हूं। डर लगता है कि कही और अनहोनी न हो जाए। कई बार एसएसपी ऑफिस जा चुकी हूं कि वीर को स्कूल तक भी सुरक्षा मिल जाए। लेकिन वह नहीं मिलती। परिवार की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं है। सारा परिवार खत्म हो गया, घर में कोई कमाने वाला भी नहीं बचा।
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