मेरठ। एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज की गंवाई हुई 50 सीटें फिर से मिलने की उम्मीद जगी है। दरअसल, मेडिकल के सुपर स्पेशियलिटी में विशेषज्ञ चिकित्सक बढ़ गए हैं। ओपीडी में मरीजों की तादाद में भी इजाफा हुआ है। इस आधार पर प्रबंधन ने नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) में सीटें बढ़ाने के लिए आवेदन किया है। जल्द ही एनएमसी की टीम निरीक्षण करने के लिए आएगी।
मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पहले 100 सीटें थीं। इन्हें बढ़ाकर साल 2013 में 150 कर दिया गया था। एमसीआई की टीमें तभी से मेडिकल कॉलेज को मानकों पर परख रही थीं, लेकिन हर बार बढ़ाई गई सीटों को लेकर खामियां रह जाती थीं। लिहाजा साल 2019 में एमसीआई (अब एनएमसी) के मानकों पर खरे न उतरने के कारण मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की 50 सीटों को कम कर दिया गया था। अस्पताल में बेड ऑक्यूपेंसी (भर्ती मरीजों की संख्या) और चिकित्सकों की कमी के कारण एनएमसी ने यह निर्णय लिया था। यहां 237 स्वीकृत पदों में से चिकित्सकों के 82 पद खाली थे। इनमें से अब 61 पद खाली रह गए हैं जबकि 21 चिकित्सकों के पद नियमित एवं संविदा पर भरे गए हैं।
प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता ने बताया कि एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज कोविड के इलाज का मुख्य केंद्र रहा है। इसके अलावा सुपर स्पेशियलिटी में काफी संख्या में चिकित्सक आ गए हैं। इससे व्यवस्था और बेहतर हो गई है। मेरठ ही नहीं पूरे पश्चिम उत्तर प्रदेश के मरीज़ों का इलाज यहां किया जा रहा है। अपनी गंवाई 50 सीटों को फिर से पाने की जुगत है, साथ ही 50 और सीटें बढ़ाने की कोशिश है, ताकि एमबीबीएस की 200 सीटें यहां हो जाएं।
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ये बढ़ गए चिकित्सक
न्यूरो सर्जरी: डॉ. अखिल प्रकाश, डॉ. महेश नारायण तिवारी, डॉ. देवेंद्र कुमार, डॉ. अमन जोत सिंह
न्यूरोलॉजी (मानसिक रोग): डॉ. दीपिका सागर, डॉ. अनिल कुमार, डॉ. सुशांत सिंह
प्लास्टिक सर्जरी: डॉ. भानु प्रताप सिंह, डॉ. कनिका सिंंगला, डॉ. अमित सिंह
कॉर्डियोलॉजी (हृदय रोग): डॉ. धीरज सोनी, डॉ. चंद्रभूषण पांडे, डॉ. शशांक पांडे, डॉ. रोहित चौहान
यूरोलॉजी (मूत्र रोग): डॉ. आकाश बंसल
गुर्दा रोग: डॉ. इंद्रजीत सिंह, डॉ. अर्पित श्रीवास्तव
गैस्ट्रो सर्जरी: डॉ. शिबू
बाल रोग सर्जरी: डॉ. विनोद चौरसिया
नेत्र रोग: डॉ िप्रयांक गर्ग,
विकिरण अधिकारी (फिजिसिस्ट): डॉ. अजय कुमार
पिछले साल 692079 मरीजों को मिला इलाज
साल 2022 में मेडिकल कॉलेज में 6,92,079 मरीज ओपीडी में आए। 50,333 रोगी अस्पताल में भर्ती किए गए। 43,140 मेजर और माइनर ऑपरेशन किए गए। माइक्रोबायोलॉजी लैब में 12 हजार से ज्यादा जांचें की गईं।