बुधवार को चार महिला गोशाला नहीं पहुंची और अपने साथी कर्मचारियों से कहा कि अब वह काम नहीं करेंगी। इससे भी बुरा हाल गोवंशों का इलाज करने वाले डॉक्टरों का है। निगम का दावा कि पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रियंका शर्मा की तैनाती है।
डॉ. प्रियंका का कहना है कि मेरा गोशाला से कोई लेनादेना नहीं है, मेरी पोस्टिंग पशु चिकित्सालय परतापुर में है। जहां से मैं 27 हजार पशुओं का इलाज करती हूं। कभी-कभी गोशाला से फोन आता है, तो मैं उपचार के लिए वहां पर चली जाती थी। गोशाला में कभी प्रभारी मंत्री और अधिकारी निरीक्षण करते थे, तब मुझे डॉ. हरपाल सिंह फोन करके बुला लेते थे। कान्हा उपवन गोशाला की सारी जिम्मेदारी नगर निगम की है। वहां पर कोई डॉक्टर नहीं है, इसके लिए मैं कई बार निगम अफसरों से बोल चुकी हूं।
एसएसपी डॉ. विपिन ताडा का कहना है कि इस प्रकरण में जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी तय है। डॉ. हरपाल के पास से कुछ दस्तावेज मिले हैं, इसकी जांच करने में पुलिस जुट गई है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर को पुलिस रिमांड पर भी लेगी। पैसे कौन-कौन लेते थे, इसकी भी जांच कराएंगे। नामजद निगम के लिपिक विकास शर्मा की तलाश में पुलिस की दबिश जारी है।
यह था मामला
परतापुर स्थित कान्हा उपवन में गोवंशों की दुर्दशा का मामला अमर उजाला ने 16 जुलाई 2025 के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। जिसके बाद नगर निगम की नींद टूटी। अस्थायी दस कर्मचारियों की सेवा समाप्त कर निगम ने पल्ला झाड़ने का प्रयास किया। भाजपा नेता विनीत शारदा अग्रवाल, पार्षद उत्तम सैनी सहित कई लोगों ने गोशाला में गोवंशों की दुर्दशा का मुद्दा प्रभारी मंत्री धर्मपाल सिंह के सामने उठा दिया।
प्रभारी मंत्री ने गोशाला का निरीक्षण किया, इसके बाद प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. हरपाल सिंह को हटाया गया। मुख्यमंत्री ने प्रमुख सचिव से जानकारी ली, इसके बाद मेरठ के प्रशासन में खलबली मची। सोमवार को परतापुर में दो कंपनी और सिविल लाइन थाने में डॉ. हरपाल पर सरकारी संपत्ति का गबन, पशु क्रूरता अधिनियम के तहत मुकदमा पंजीकृत हुआ। मंगलवार को उन्हें कोर्ट ने पेश किया, जहां से उनको न्यायिक हिरासत में लेकर 14 दिन के लिए जेल भेजा।
डॉ. हरपाल सिंह के ऑफिस की पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज मांगी है। गोशाला में चारे के नियमित बिल कौन सी फर्म से आते थे। लाठी-डंडों की सप्लाई के बिल देने वाली फर्म, नामजद दोनों कंपनियों का रिकॉर्ड, भूसा, चोकर, हरा चारा और अन्य सामान के बिल, भुगतान कैसे हुआ। डॉ. हरपाल के अलावा गोशाला की जिम्मेदारी किस-किसकी थी, इसको लेकर भी पुलिस निगम के अधिकारियों से पूछताछ करेगी।