हिंडन नदी को प्रदूषण से मुक्त कराने के लिए 2144 करोड़ की परियोजना स्वीकृत कराई जाएगी। आसपास के नालों को डायवर्जन किया जाएगा। मंडलायुक्त आलोक सिन्हा ने नदी के किनारे बसे ग्रामों में तालाबों को पुनर्जीवित कराने, पौधे लगाने, लोगों को जागरूक करने की बात कही है। साथ ही नगर निगम, नगर निकायों और औद्योगिक संस्थानों कोे नोटिस जारी करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
आयुक्त सभागार में बृहस्पतिवार को हुई बैठक में कमिश्नर ने कहा कि गांवों की जमीन का पानी ग्रामवासियों का ही है। यह भाव ग्रामवासियों में जागरूक कर उन्हें ज्यादा से ज्यादा अभियान से जोड़ें। प्रत्येक जनपद के एक-एक ग्राम को मॉडल ग्राम बनाएं। तालाबों के किनारे जामुन, नीम, शीशम व आम आदि के पेड़ लगवाएं। आयुक्त ने कहा कि गाजियाबाद की अर्थला झील के आसपास हो रहे अतिक्रमण को शीघ्र हटाया जाए। केंद्र सरकार की योजना जल क्रांति से दो-दो ग्रामों को लाभान्वित किया जाए। डीएम हिंडन व उसकी सहायक नदी के आसपास पांच किमी के परिक्षेत्र के ग्रामों में तालाबों को चिह्नित करें। मनरेगा या श्रमदान से वहां काम कराएं।
योजना कराएंगे मंजूर
उत्तर प्रदेश जल निगम द्वारा हिंडन के आसपास के नालों के डायवर्जन के लिए 2144 करोड़ रुपये की योजना नमामि गंगे में नगर विकास विभाग ने बनाई है। कमिश्नर ने कहा कि इसे स्वीकृत कराकर मूर्त रूप देने का प्रयास किया जाएगा। इस योजना में बागपत, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद जनपद आते हैं। उन्होंने इस संबंध में नगर विकास सचिव, निदेशक नमामि गंगे प्रोजेक्ट को उनकी ओर से पत्र प्रेषित करने के लिये निर्देशित किया। सीडीओ विशाख जी. ने इस प्रोजेक्ट पर विस्तार से प्रकाश डाला।
316 उद्योग हैं तट पर
अपर आयुक्त आरएस धामा ने बताया कि विभिन्न जनपदों में हिंडन व उसकी सहायक नदी के किनारों पर विभिन्न प्रकार के 316 उद्योग स्थापित हैं। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा हिंडन व इसकी सहायक नदी में प्रदूषण की मात्रा मापी जाती है। हिंडन में नगरीय क्षेत्रों में विभिन्न स्थलों में लगभग 68 नाले गिरते हैं। विभिन्न नगरों के सीवरेज की निकासी भी नालों के माध्यम से इन्हीं नदियों में होती है। इन सभी विषमताओं को दूर करने के लिए शासन व प्रशासन गंभीरता से प्रयास कर रहा है। बैठक में डीएम हापुड़ अजय ढींगरा, अपर जिलाधिकारी एफआर गौरव वर्मा, अपर जिलाधिकारी प्रशासन गाजियाबाद ज्ञानेंद्र सिंह, इंडिया वाटर पार्टनरशिप की कंट्री कोआर्डिनेटर वीना खंडूरी, एनजीओ की कोऑर्डिनेटर अन्ना, मुख्य अभियंता ट्यूबवेल वाटर चंद्रन बहादुर, एई प्रदूषण विभाग आरके सिंह, एसआर मौर्य, एसएस सिंह, बीडी शर्मा, भारतीय किसान आंदोलन के कुलदीप त्यागी, उप निदेशक सूचना नवल कान्त तिवारी मौजूद रहे।