सरूरपुर। डाहर गांव बृहस्पतिवार को घटिया सामग्री और लापरवाही के चलते पांच लाख रुपये की लागत से बनाए गए शौचालय का लिंटर भरभरा कर गिर गया था। शुक्रवार को डीपीआरओ डाहर गांव पहुंचे। उन्होंने मामले की जांच की तथा अन्य विकास कार्यों का भी मौके पर जाकर सत्यापन किया। वहीं दो रास्ते मिले जिनको बनाया नहीं गया, लेकिन उनका बिल भुगतान हो चुका था। डीपीआरओ ने मामले में जांच बैठा दी है।
ब्लॉक सरूरपुर के डाहर गांव में पांच लाख की लागत से स्वच्छ भारत अभियान के तहत शौचालय का निर्माण किया जा रहा था। बृहस्पतिवार को ठेकेदार ओम सिंह ने लिंटर डलवाया था, लेकिन चंद घंटों बाद ही लिंटर भरभरा कर गिर गया। ग्रामीणों का आरोप था कि ठेकेदार ने मिलीभगत से घटिया निर्माण सामग्री लगई है। शुक्रवार को डीपीआरओ आलोक सिन्हा खुद मौके पर पहुंचे और जांच की। एडीओ पंचायत भूपेंद्र शर्मा, सचिव अमित कुमार को गंभीरता नहीं बरतने पर चेतावनी जारी की। डीपीआरओ ने पहले से ही डाहर गांव में चल रही प्रधान के खिलाफ जांच के मामले में दो अन्य रास्तों की जांच की। उन्हें रिठाली व मंदिर वाले मार्ग पर रास्ते बने हुए ही नहीं मिले, जबकि रिकॉर्ड के मुताबिक प्रधान ने मिलीभगत करके 10 लाख रुपए धन जारी करा लिया। गबन के मामले में पहले से ही प्रधान प्रवीण कुमार पर घोटाले की जांच चल रही है। वहीं, खंड विकास अधिकारी अमित कुमार का कहना है कि निर्माण कार्यों के सत्यापन के बाद भी भुगतना किया जाएगा। जिन कार्यों में अनियमितता पाई जाती है उनका भुगतान रोका जाएगा।