मेरठ। जिला पंचायत का अध्यक्ष भाजपा का होगा या सपा का, यह 11 ‘जयचंद’ तय करेंगे। दोनों दलों के दावे चाहे कुछ भी हों, लेकिन बुधवार रात तक दोनों ही खेमे क्रॉस वोटिंग के खतरे से सहमे नजर आए। इस खतरे के बीच प्रत्याशी और नेता समर्थन जुटाने में लगे रहे।
दरअसल, जिला पंचायत में कुल 34 सदस्य निर्वाचित होकर आए हैं। भाजपा अपने समर्थन में 23 तो सपा 22 वोट होने का दावा कर रही है। दोनों दलों के दावों पर गौर करें तो आंकड़ा 45 का बैठता है।
इससे यह स्पष्ट है कि 11 वोट ऐसे हैं, जो दोनों तरफ के आंकड़ों को प्रभावित कर रहे हैं। इन दावों के बीच दोनों दल भी क्रॉस वोटिंग की आशंका से चिंतित हैं।
लेकिन, उनकी समझ से ये ‘जयचंद’ बाहर हैं। सूत्रों की मानें तो इस बार पूरा चुनाव इन्हीं ‘जयचंदों’ पर टिका है। चुनाव में क्रॉस वोटिंग भी तय मानी जा रही है।
यह है दोनों दलों का गुणा-भाग
भाजपा प्रत्याशी कुलविंदर सिंह के पक्ष में भाजपा के नौ और बसपा के पांच वोट ऐसे हैं, जो पहले दिन से साथ नजर आ रहे हैं। इनके सबके बीच छह निर्दलीय वोट भाजपा अपने खेमे में आने का पुख्ता दावा कर रही है।
जबकि, तीन वोट सपा खेमे से क्रॉस होने का दावा करते हुए 23 वोटों का समर्थन बताया जा रहा है। वहीं, सपा की सीमा प्रधान के पक्ष में पांच वोट सपा और चार वोट बसपा के हैं। इनके अलावा एक वोट भाजपा से टूटकर सपा में पहले ही जा चुका है।
इससे सपा का कुल योग 10 बन रहा है। इसके अलावा सपा ने 10 निर्दलीय वोट भी अपने खेमे में होने का दावा किया है। सपा को यह उम्मीद है कि दो वोट क्रॉस होकर उसके पक्ष में आएंगे। इस आधार पर वह 22 वोट मिलने का दावा कर रही है।
मुस्लिम वोटों पर है विशेष नजर
मुस्लिम बिरादरी से जिला पंचायत के पांच सदस्य निर्वाचित होकर आए हैं। इनमें नवाजिश मंजूर को छोड़ दें तो बाकी चार वोट निर्णायक भूमिका में हैं।
सपा भले ही कितनी एकजुटता का दावा कर रही हो, लेकिन अतुल प्रधान और कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर के बीच मतभेद सार्वजनिक होने के बाद इन मुस्लिम वोटों पर सभी की नजर है। फिलहाल, सपा ये पांचों वोट अपने खाते में मानकर चल रही है। लेकिन, इनमें से एक भी वोट सपा से हटता है तो वह अहम भूमिका अदा करेगा।