उत्तर प्रदेश के मेरठ में जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए चुनाव अधिसूचना जारी होने से पहले ही भाजपा का प्रत्याशी घोषित करना उसकी रणनीति का हिस्सा है। अब विपक्ष की ओर से इसकी काट के लिए जातिगत समीकरण साधने के साथ ही एकजुटता पर जोर दिया जा रहा है।
33 में से कुल पांच सदस्य जिताने में कामयाब भाजपा को जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर जीत के लिए 12 सदस्यों की जरूरत पड़ेगी। बावजूद इसके भाजपा ने प्रत्याशी घोषित कर यह संदेश दिया है कि वह चुनाव मजबूती से लड़ेगी। दूसरा मकसद ये भी है कि जीत के लिए जरूरी आंकड़ा जुटाने के लिए प्रत्याशी और पार्टी नेता अगर पूरी शिद्दत से काम करेंगे तो नवनिर्वाचित जिला पंचायत सदस्यों में से कुछ पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में आ सकते हैं।
विपक्ष का गुर्जर प्रत्याशी उतारने पर जोर
जिला पंचायत अध्यक्ष काफी हद तक जातिगत आधार पर होता है। पिछले चुनाव में जातिगत समीकरण ने ही सपना हुड्डा के सपने को तोड़ दिया था। एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी अतुल प्रधान और मुखिया गुर्जर साथ आ गए थे। ऐसे में सात गुर्जर, पांच मुस्लिम और आठ दलित मतदाताओं के साथ विपक्ष भाजपा को पटखनी देने पर अड़ा है। इसके साथ ही त्यागी, ब्राहमण मतदाताओं पर भी विपक्ष की नजर है।
एक दूसरे खेमे में सेंधमारी की तैयारी
तय है कि भाजपा जब तक दूसरे दलों में सेंधमारी नहीं करेगी, तब तक उसे सफलता नहीं मिलेगी। दूसरी ओर विपक्ष यदि एकजुट हो जाता है तो उसे भाजपा में सेंधमारी की जरूरत नहीं पड़ेगी। हालांकि विपक्ष ने भाजपा में सेंधमारी की तैयारी शुरू कर उसे अतिरिक्त झटका देने की योजना पर भी काम शुरू कर दिया है।