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चारित्र के बिना वीतरागता संभव नहीं : भाव भूषण

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प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत मंदिर
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-पूर्ण आहूति के साथ संपन्न हुआ सिद्धचक्र महामण्डल विधान
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संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर के त्रिमूर्ति जिनालय में चल रहे सिद्धचक्र महामंडल विधान के अंतिम दिन भक्तों ने जाप अनुष्ठान किया तथा भगवान शांतिनाथ के अभिषेक के साथ-साथ शांतिधारा करने का सौभाग्य राकेश जैन, आलोक जैन, वीरेंद्र जैन, सुमन जैन आदि को प्राप्त हुआ।
मुनि भाव भूषण महाराज ने कहा कि वीतरागता को प्राप्त करने के लिए चारित्र का होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि जैसे प्यास केवल पानी से ही बुझती है, उसी प्रकार संसार में सच्चा सुख प्राप्त करने के लिए भक्ति ही एकमात्र साधन है।
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मुनिश्री ने कहा कि वर्तमान समय में भक्ति सबसे सुलभ और सरल मार्ग है लेकिन इसके लिए सम्यक दर्शन का होना अनिवार्य है। जब तक व्यक्ति को सम्यक दर्शन की प्राप्ति नहीं होती तब तक वह संसार के चक्र से मुक्त होकर सिद्धचक्र की ओर अग्रसर नहीं हो सकता। उन्होंने बताया कि मनुष्य के भीतर क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार जैसे विकार ही बंधन का कारण हैं, जिन्हें त्यागकर ही आत्मिक शांति प्राप्त की जा सकती है।
प्रवचन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। उन्होंने धर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। मुनिश्री के विचारों ने उपस्थित जनसमूह को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित किया। धूप दीप के साथ सभी भक्तों ने जिनेंद्र भगवान की अराधना करते हुए हवन की मांगलिक क्रियाओं को संपन्न किया। सभी श्रद्धालुओं ने विश्व शांति की कामना की।
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क्षेत्र के अध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन, राजीव जैन, राजीव जैन, अनिल जैन अतुल जैन, महाप्रबंधक मुकेश जैन, उमेश जैन, अतुल जैन, आदि ने सहयोग किया।
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