मेरठ। महानगर में डेयरियों का जाल फैला है, इससे गंदगी फैल रही है। नालों में गोबर बहाया जा रहा है। मामला हाईकोर्ट में पहुंचा था। डेयरी संचालकों की अपील पर महानगर में कैटल कॉलोनी बनाने की बात कही, जिसको जिला प्रशासन नहीं बनवा पाया। नगर निगम जुर्माने का नोटिस देकर खानापूर्ति करता रहा। छह महीने पहले निगम अधिकारियों ने नफीसा की डेयरी को अवैध तरीके से संचालित करने पर 20 हजार का जुर्माना लगाया था। थाने में भी इसकी शिकायत की थी।
अवैध डेयरियों की शिकायत के बावजूद नगर निगम कार्रवाई नहीं करता। शहर से डेयरियों को बाहर करने के लिए कैटल कॉलोनी बनाने की बात कोर्ट ने कही थी, जो विकास प्राधिकरण को बनानी थी। इसको लेकर कई बार नगर निगम और विकास प्राधिकरण सहित अन्य विभाग के अधिकारियों के साथ डेयरी संचालकों की बैठक हुई। जिसमें कोई समाधान नहीं निकला। निगम की बोर्ड बैठक में पार्षदों ने प्रस्ताव पास भी कराया कि घरों में चल रही अवैध डेयरियों को बंद कराया जाए। कई जगहों पर डेयरियों के कारण जलभराव होता है।
-
डेयरी संचालक को नोटिस देने का काम नगर निगम करता है। स्थानीय पार्षद इकराम बालियान की शिकायत पर जाकिर कॉलोनी में अभियान चलाकर डेयरी संचालकों को नोटिस भेजा गया है। कैटल कॉलोनी को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक हुई है।
डॉ. हरपाल सिंह, प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी
हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार कैटल कॉलोनी को शहर से बाहर किया जाना है। प्राधिकरण के पास शहर से बाहर भूमि नहीं है। ऐसे में जिलाधिकारी से अर्बन सीलिंग की भूमि की मांग की गई है।
अभिषेक पांडेय, उपाध्यक्ष मेरठ विकास प्राधिकरण