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सरकारी योजनाओं की खुली पोल, तीन माह से 'शोपीस' बनी है सवा करोड़ की डिजिटल एक्सरे मशीन 

Tue, 05 Feb 2019 02:02 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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मेडिकल कॉलेज में करीब सवा करोड़ रुपये कीमत की डिजिटल एक्सरे मशीन ‘शोपीस’ बनी हुई है। इसे आए हुए तीन माह से ज्यादा हो गए, लेकिन यह चालू नहीं हो पाई है। मरीज डिजिटल एक्सरे कराने के लिए बाहर जाने को मजबूर हैं। इमरजेंसी के स्ट्रेचर पर कई मरीजों की बाहर डिजिटल एक्सरे कराने जाते हुए वीडियो और फोटोग्राफ वायरल भी हो चुके हैं।

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मेडिकल कॉलेज में हर माह तीन हजार से ज्यादा मरीजों को एक्सरे की जरूरत पड़ती है। 36 से 40 हजार एक्सरे सालभर में होते हैं। प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना से रेडियोलॉजी विभाग के उन्नयन के लिए करीब डेढ़ करोड़ रुपये मंजूर हुए थे।


इसमें से सवा करोड़ की हाईटेक डिजिटल एक्सरे मशीन नीदरलैंड से मंगाई गई, जबकि शेष धनराशि से अस्पताल में डिजिटल एक्सरे की अलग विंग तैयार की गई। इसके एक कक्ष में यह मशीन स्थापित की गई। बताया गया कि नवंबर 2018 तक इसे शुरू किया जाएगा, लेकिन अभी तक यह चालू नहीं की गई है।

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पुराने जमाने की एक्सरे मशीनों से चलाया जा रहा काम
प्राइवेट सेंटरों पर डिजिटल एक्सरे के लिए 300 से 500 रुपये खर्च करने पड़ते हैं, जबकि यहां यह कम दामों में किया जाना है। फीस अभी तय नहीं है। बीपीएल कार्ड धारकों के लिए सुविधा निशुल्क रहेगी। अभी तक पुराने जमाने की एक्सरे मशीनों से काम चलाया जा रहा है।
सामान्य एक्सरे 100 से 150 रुपये में मार्केट में होता है, जबकि मेडिकल कॉलेज 41 रुपये में होता है। हालांकि यहां फिल्म की क्वालिटी को लेकर शिकायतें रहती हैं। जबकि डिजिटल एक्सरे में यह डायरेक्ट डिजिटल रेडियोग्राफर है। इसमें मरीज को टेबल पर लिटाया जाएगा और महज छह सेकेंड में एक्सरे इमेज कंप्यूटर पर आ जाएगी। एक घंटे में मरीज के हाथ में रिपोर्ट होगी।

रोजाना किए जा सकते हैं  एक हजार एक्सरे
डिजिटल एक्सरे के लिए फिल्म लगाने की जरूरत नहीं होगी। इस मशीन से रोजाना एक हजार एक्सरे किए जा सकेंगे। कई इमेज में से अच्छी इमेज चुनी जा सकेगी।
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सामान्य एक्सरे के लिए भी मारामारी
मेडिकल कॉलेज में सामान्य एक्सरे के लिए मारामारी चल रही है। जिस संस्था को एक्सरे फिल्म देनी थी, वह उसकी आपूर्ति नहीं कर पा रही है। हर रोज करीब 150-200 एक्सरे होते हैं। जब से यह अव्यवस्था है, तब से सिर्फ 100 ही हो पा रहे हैं। इस संबंध में लैब टेक्नीशियन आरआर मिश्रा ने बताया कि फिल्म आ गई हैं, एक-दो दिन में यह समस्या दूर हो जाएगी।

लाइसेंस निलंबित, इसलिए आ रही दिक्कत
डिजिटल एक्सरे शुरू करने के लिए टाटा एटॉमिक रिसर्च सेंटर से लाइसेंस की जरूरत पड़ती है, जो कि निलंबित चल रहा है। जल्द ही इसे शुरू कराने की तैयारी है, कोशिश जारी है। मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी दी जाएगी। पूरा उपचार किया जाएगा। - डॉ. आरसी गुप्ता, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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