डेंगू व चिकनगुनिया रोकने में नाकाम रहने वाले स्वास्थ्य विभाग की स्थिति हाईकोर्ट की फटकार लगने के बाद भी नहीं सुधरी हैं। हाईकोर्ट अब स्वास्थ्य केंद्रों की निगरानी अपने स्तर पर करा रहा है, जिसके लिए डीजी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण से लेकर शासन में बैठे उच्चाधिकारियों की जिम्मेदारी फिक्स की जा रही है। स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति व गैरहाजिर पाये गए स्टाफ पर कार्रवाई की रिपोर्ट सीधे हाईकोर्ट में रखी जानी है। जिसको देखते हुए शुक्रवार को डीजी हेल्थ के निर्देश पर प्रदेश भर में सीएमओ ने स्वास्थ्य केंद्रों पर छापामारी कराई। लेकिन हालात पहले से कहीं ज्यादा बदतर मिले।
इस औचक निरीक्षण के दौरान आठ स्वास्थ्य केंद्रों से स्टाफ गायब मिला, तो कुछ स्वास्थ्य केंद्रों पर डिलीवरी की सुविधा होने के बाद भी जनवरी माह में एक भी डिलीवरी नहीं हुई। कुछ जगहों पर डिलीवरी रूम बंद पड़े थे, तो कहीं भारी गंदगी थी। साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था नहीं थी। दो शिफ्टों में कराये गए निरीक्षण के बाद सभी जांच अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट सीएमओ को सौंपी है। यह एक्शन रिपोर्ट शासन से सीधे हाईकोर्ट को जाएगी।
बदतर मिले हालात : निरीक्षण लाइव
तोहफापुर एडिशनल पीएचसी
चिकित्सक व फार्मेसिस्ट छुट्टी पर हैं। सफाई कर्मचारी स्वास्थ्य केंद्र पर ताला लगाकर बाहर घूम रहा है। निरीक्षण करने गई टीम स्टाफ को खोज रही है और स्थानीय लोगों से पूछ रही है कि यहां पर आज कोई आया या नहीं। एक स्थानीय व्यक्ति ने टीम के अफसर को जवाब दिया कि साहब अभी सफाई कर्मचारी तो आया था, वो यहीं पर गया होगा। खास बात यह रही कि यहां चिकित्सक व फार्मेसिस्ट की छुट्टी की एप्लीकेशन रजिस्टर में रखी मिली। जबकि दोनों ही केंद्र से गायब थे।
अगवानपुर एडिशनल पीएचसी
डॉक्टर ड्यूटी पर नहीं मिला। दवा देने वाला फार्मेसिस्ट मरीज को देख रहा था। निरीक्षण टीम को फार्मेसिस्ट ने बताया है कि डॉक्टर साहब की किला परीक्षितगढ़ की सीएचसी पर नाइट ड्यूटी है। इसलिए वो आज आये नहीं हैं।
सीएमओ कार्यालय पर
दोपहर तक निरीक्षण के बाद स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की टीम निरीक्षण रिपोर्ट सबमिट करने सीएमओ कार्यालय पहुंची। इस बीच वहां सीएचसी, पीएचसी व एडिशनल पीएचसी से गायब स्टाफ पहुंचना शुरू हो गया। कोई सिफारिश लेकर आया तो कोई हाथ जोड़कर कह रहा था कि बस मजबूरी में फंसा था। आगे से टाइम पर जाऊंगा। सभी की कोशिश थी कि रिपोर्ट से उसका नाम निकल जाए।
सामने आया छुट्टी का घोटाला
डीजी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण ने कोर्ट के आदेश पर चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ की छुट्टी पर अग्रिम आदेश तक रोक लगाई थी। अपने आदेश में डीजी ने स्पष्ट किया था कि विशेष परिस्थिति में सीएमओ व सीएमएस ही छुट्टी स्वीकृत करेंगे। अन्यथा की स्थिति में किसी को छुट्टी स्वीकृत करने का अधिकार नहीं होगा। इस संबंध में 2 दिसंबर, 19 दिसंबर और अब 6 जनवरी को फिर से रिमाइंड भेजा गया। लेकिन यहां पर निरीक्षण के दौरान छुट्टी का नया घोटाला पकड़ में आया है। चिकित्सा व पैरामेडिकल स्टाफ कैजुअल लीव (सीएल) की एप्लीकेशन अपने रिपोर्टिंग अधिकारी को या फिर रजिस्टर में रखकर चले जाते हैं। फिर अगले दिन आकर उसे फाड़ देते हैं। जिस दिन अवकाश पर रहते है, तो उसके अगले दिन अपनी उपस्थिति लगा देते हैं। ऐसा इसलिए होता ताकि निरीक्षण के समय बताया जा सके कि मेरी तरफ से तो एप्लीकेशन दी गई थी। लेकिन यहां पर बिना छुट्टी स्वीकृति हुए ही चिकित्सक व पैरामेडिकल स्टाफ गायब मिला है।