हस्तिनापुर। पिछले कई वर्षों से मेला स्थल को मखदूमपुर गांव के सामने गंगा घाट पर लगाया जा रहा था। इसके लिए श्रद्धालुओं को ज्यादा से ज्यादा तीन किलोमीटर सफर पैदल तय करना पड़ता था। परंतु इस बार गंगा के जलस्तर ने कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर लगने वाले मेले की भौगोलिक स्थिति बदल दी है। इससे श्रद्धालुओं को अधिक दूरी तय करनी पड़ेगी।
इस बार मखदूमपुर गंगा घाट पर लगने वाला मेला बस्तौरा गांव के सामने लगेगा। स्थानीय लोगों ने बताया कि करीब 20 वर्षों बाद इस स्थान पर मेले का आयोजन किया जा रहा है। जबकि गत वर्षों में मखदूमपुर गांव के आसपास ही मेले का आयोजन होता था, परंतु बरसात के दिनों में गंगा के जलस्तर ने मेला स्थल की भौगोलिक स्थिति को इस बार बदल दिया है। इससे श्रद्धालुओं को मेला स्थल तक पहुंचाने के लिए चार किलोमीटर से अधिक गंगा की रेती में सफर करना होगा। यह सफर उनके लिए काफी मुश्किलों भरा रहेगा। मेला स्थल तक पहुंचने के लिए गंगा के एक स्रोत पर पाइप बिछाकर सड़क बनाई गई है।
स्रोत के पुल की चौड़ाई कम, लगेगा जाम
किशोरपुर के ग्राम प्रधान ऋषिपाल मलिक ने बताया कि मेला स्थल से पहले गंगा का एक छोटा सा स्रोत है, जिस पर जिला पंचायत द्वारा एक वैकल्पिक पुलिया बनाकर रास्ता बनाया गया है। इसकी चौड़ाई काफी कम है। यहां पर श्रद्धालु तो सिलसिलेवार आएंगे, परंतु जब इधर से जाने का सिलसिला शुरू होगा तो इस रास्ते पर श्रद्धालुओं को जाम की समस्या से दो-चार होना पड़ेगा। इसके लिए जिला पंचायत के अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। अगर इसकी चौड़ाई नहीं बढ़ाई गई तो यहां अव्यवस्था देखने को मिलेगी, जिसका खामियाजा श्रद्धालुओं को भुगतना पड़ेगा। लोगों का कहना है कि मेला स्थल पर जाने के लिए अभी तक जिला पंचायत द्वारा रास्तों को पूर्ण रूप से दुरुस्त नहीं किया गया है। इन रास्तों पर रेत में चलना श्रद्धालुओं के लिए काफी मुश्किलों भरा रहेगा। जबकि उद्घाटन में मात्र दो दिन शेष रह गए हैं।
अवैध शराब पर रहेगी नजर
आबकारी निरीक्षक बेबी चांद खान ने बताया कि मेला स्थल पर किसी भी तरह की शराब ले जाना पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है। जिलाधिकारी के निर्देश पर जो भी व्यक्ति मेला स्थल पर शराब ले जाता पाया जाएगा, उसके खिलाफ आबकारी विभाग सख्त कार्रवाई करेगा।