बहसूमा। क्षेत्र के तजपुरा गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन बृहस्पतिवार को कथा पंडाल में भक्तों की बड़ी उमड़ पड़ी। कथावाचक कृष्ण भक्त अमित महाराज ने व्यास गद्दी से भगवान वामन अवतार और राजा बलि के अद्भुत त्याग का मार्मिक वर्णन किया।
कथावाचक ने बताया कि असुर राज बलि ने इंद्रलोक पर अधिकार कर लिया था। अपनी शक्ति के घमंड में बलि ने विश्वजीत यज्ञ शुरू किया। तब देवताओं की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने वामन रूप में अवतार लिया। एक छोटे से ब्राह्मण बटुक के रूप में वामन भगवान राजा बलि की यज्ञशाला में पहुंचे। उनकी तेजस्वी छवि देखकर सभी मंत्रमुग्ध हो गए। बलि ने उनका स्वागत कर इच्छित दान मांगने के लिए कहा। वामन भगवान ने बलि से केवल तीन पग भूमि मांगी। गुरु शुक्राचार्य के मना करने पर भी दानी बलि ने वचन दे दिया। तब भगवान ने विराट रूप धारण कर एक पग में पूरी पृथ्वी और दूसरे में स्वर्ग नाप लिया। तीसरे पग के लिए बलि ने अपना सिर झुका दिया।
बलि के त्याग और समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान ने उसे पाताल का राजा बना दिया और स्वयं उसके द्वारपाल बने। कथा सुनकर श्रोता भावुक हो गए। पंडाल वामन भगवान के जयकारों से गूंज उठा।
बहसूमा। ताजपुर गांव में भागवत कथा सुनती महिलाएं श्रद्धालु