मेरठ। परतापुर बाईपास वेदव्यासपुरी स्थित द्वारिका हाइटस में भरत चरित्र कथा के दूसरे दिन कथा वाचक ने स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज ने श्रीराम भरत मिलाप प्रसंग सुनाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि भरत को जब पता चला कि माता कैकयी ने राम को वन भेज दिया है तो उन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। भरत ने चित्रकूट जाने के लिए सबको तैयार किया और वहां पहुंचकर श्रीराम से मिले। भरत ने श्रीराम से वापस लौटने की प्रार्थना की, पर श्रीराम ने कहा यदि मैं अयोध्या लौट चलूंगा तो शबरी माता को दर्शन कैसे दे पाऊंगा। भगवान ने अपनी चरण पादुका देकर भरत को अयोध्या लौटाया। भरत के समान भाई कोई दूसरा नहीं हो सकता। कहा कि भरत चरित्र को नियम से सुनने से राम के चरणों में प्रेम उत्पन्न हो जाता है। इस दौरान ललित शर्मा, शुभम यादव, मनीष खंडेलवाल, राजेश वर्मा, पवन दत्त मिश्रा आदि मौजूद रहे। संवाद