प्रसिद्ध लेखक व गीतकार जावेद अख्तर के लाउडस्पीकर पर अजान देने का विरोध करने पर देवबंदी उलमा ने नाराजगी जताई है। मदरसा जामिया शेखुल हिंद के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती असद कासमी का कहना है कि देश के संविधान ने सभी को धार्मिक आजादी दी हुई है। इसलिए अजान का विरोध संविधान का विरोध है।
उन्होंने कहा कि देश में सभी धर्म के लोग अपने अपने धार्मिक स्थलों में लाउडस्पीकर का इस्तेमाल करते हैं। जावेद अख्तर का सिर्फ अजान को लेकर विरोध जताना समझ से परे हैं, जबकि मस्जिदों से जो अजान दी जाती है वह कुछ मिनट की होती है। उससे किसी को परेशानी हो ऐसा नहीं लगता।
तंजीम अबना-ए-दारुल उलूम के अध्यक्ष मुफ्ती यादे इलाही कासमी व मुफ्ती तारिक का कहना है कि जिन बस्तियों में कम आबादी होती है और मस्जिद छोटी होती हैं, वहां पर बिना लाउडस्पीकर के भी अजान दी जाती हैं। लेकिन जहां पर आबादी ज्यादा हो वहां पर लाउडस्पीकर से ही अजान देकर लोगों को यह बताया जाता है कि नमाज का वक्त हो गया है।
जावेद अख्तर को इससे क्या परेशानी हैं। उन्होंने अपनी बात में इसका जिक्र नहीं किया। गीतकार जावेद अख्तर ने शनिवार को एक ट्वीट किया। जिसमें लिखा कि अजान ठीक है, लेकिन लाउडस्पीकर दूसरों के लिए असुविधा का कारण बनता है। आगे उन्होंने कहा कि लाउडस्पीकर का इस्तेमाल चिंता की बात है, वह चाहे मंदिर हो या मस्जिद।