सोशल साइट्स पर भड़काऊ पोस्ट डालने वालों पर नजर रखने के लिए चार साल पूर्व मेरठ में लैब की स्थापना की गई थी। तब तक व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर जैसी सोशल साइट प्रचलन में थीं, लेकिन बीते तीन वर्ष में ऐसे विभिन्न एप्लीकेशन भी ईजाद हुईं, जिनसे ऑनलाइन चैटिंग की जाती है और उनका रिकाॅर्ड भी सुरक्षित नहीं रह पाता है।
वहीं, देवबंद से गिरफ्तार किए गए दोनों आतंकियों के बारे में भी यही पता चला कि वह दोनों एंड्रायड फोन से स्पेशल एप्लीकेशन के जरिये लोगों से जुड़ते थे। इसमें वह पश्चिमी यूपी के भी काफी लोगों से संपर्क में रहे होंगे, इससे भी इंकार नहीं किया जा सकता है।
फिलहाल गिरफ्तार दोनों आरोपियों को एटीएस की टीम अपने साथ सहारनपुर से लखनऊ ले गई है। वहां दोनों आरोपियों से इन सभी बिन्दुओं पर पूछताछ होगी कि इन लोगों ने ऑनलाइन किस किससे संबंध स्थापित किए थे।
आरोपियों द्वारा कई महीने से पश्चिमी यूपी में सक्रिय रहने की बात से बड़े खतरे की तरफ इशारा भी हो रहा है। यानी ये दोनों आतंकी पश्चिमी यूपी में किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में थे, क्योंकि इस दौरान आतंकियों ने देवबंद में रहने के अलावा पश्चिमी यूपी के शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर सहित अन्य जनपदों में अपना नेटवर्क खड़ा करने का प्रयास किया होगा।
इस काम के लिए इन्हें क्यों चुना गया इसकी वजह यह भी सामने आ रही है कि ये दोनों ही अच्छी उर्दू बोलते थे इसलिए आस पास के माहौल में जल्दी घुल मिल गए। नाज मंजिल छात्रावास में रह रहे शाहनवाज और आकिब कश्मीर के होने के बावजूद देवबंद में रहने में कोई परेशानी नहीं हुई।
गौरतलब है कि अधिकांश छात्र आपस में उर्दू भाषा का प्रयोग करते हैं। शाहनवाज और आकिब को उर्दू की अच्छी जानकारी थी। जिस कारण वह अन्य छात्रों से उसी भाषा में बात करते थे। इसलिए अन्य छात्रों के साथ आसानी से घुल मिल गए थे।
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