एसपी ने बताया कि देवबंद पुलिस ने 23 जनवरी को तमंचे के साथ कोटला निवासी आसिफ को पकड़ा था। पूछताछ में बताया कि वह तैय्यबपुर बडा गांव से तमंचा खरीदकर लाया था। इसके बाद पुलिस ने अपने स्तर पर छानबीन की तो पता चला कि एक मकान के अंदर असलाह बनाने की फैक्टरी चल रही है।
पुलिस ने शुक्रवार को मकान पर छापा मारकर दो आरोपियों को पकड़ा, जिनकी पहचान तैय्यबपुर बडा गांव निवासी धनपाल सिंह और दानिश के रूप में हुई, जिस मकान में यह फैक्टरी चल रही थी, वह धनपाल के पिता तेल्लू सिंह के नाम पर है।
तमंचे बनाने में माहिर है धनपाल और दानिश
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वह बेरोजगार है। दोनों को हथियार बनाने आते हैं। इसलिए उन्होंने यह फैक्टरी शुरू की। आरोपी इतने माहिर है कि कुछ घंटों के अंदर ही तमंचा तैयार कर देते हैं। इसके अलावा खोखा कारतूस भी रिफिल कर लेते थे। एक देशी तमंचा बनाने में 500 से एक हजार रुपये का खर्च आता है, जिसे वह पांच से दस हजार रुपये तक बेच देते थे। इससे उन्हें अच्छा मुनाफा होता था और उसे आपस में बांट लेते थे। पकड़े गए आरोपी दाशिन का आपराधिक इतिहास भी है। उस पर पोक्सो एक्ट और एससी-एसटी एक्ट के तहत भी मामला दर्ज है। दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज करा दिया गया है।