फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

‘सीएम’ से बड़े सीएमओ

Sun, 20 Sep 2015 02:29 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला मेरठ
विज्ञापन
विज्ञापन
जिले में डेंगू से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है और स्वास्थ्य विभाग ट्रांसफर-पोस्टिंग के खेल में लगा है। सीएमओ मेरठ डॉ. रमेश चंद्रा शासनादेश से आगे जाते हुए सितंबर महीने में चिकित्सकों, एएनएम और कर्मचारियों की पोस्टिंग में लगे हैं।
विज्ञापन


शनिवार को करीब छह चिकित्सकों का ट्रांसफर किया गया, जिसमें एसीएमओ डॉ. संजय जोधा का नाम भी शामिल है। जबकि इससे पहले कई एएनएम और कर्मचारियों का भी स्थानांतरण किया जा चुका है।

शासन का स्पष्ट निर्देश है कि चिकित्सकों और कर्मचारियों का स्थानांतरण 31 जुलाई तक हो जाना चाहिए। इसके बाद अगर एडी स्तर तक के चिकित्सक का स्थानांतरण किया जाना है तो उसके लिए शासन के माध्यम से मुख्यमंत्री से परमिशन लेनी होगी। इसी तरह से कर्मचारियों का स्थानांतरण निदेशक प्रशासन की अनुमति के बिना सीएमओ को करने का अधिकार नहीं है।
विज्ञापन


लेकिन यहां पर कुछ लोगों को ठिकाने लगाने और कुछ के रास्ते अपने हितों को सीधा करने के लिए सीएमओ कार्यालय में ट्रांसफर पोस्टिंग की पूरी इंडस्ट्री संचालित हो रही है। सीएमओ ने शासनादेश से ऊपर जाते हुए ट्रांसफर किए हैं।

शनिवार को एसीएमओ वैक्टर बोन डॉ. संजय जोधा का स्थानांतरण वरिष्ठ परामर्शदाता जिला कारागार में यह कहते हुए कर दिया गया है कि आपके द्वारा वैक्टर बोन का कार्य संतोष जनक तरीके से नहीं देखा जा रहा है। इसके साथ ही भावनपुर सीएचसी इंचार्ज डॉ. सुरेंद्र पाल सिंह को जेल में परामर्शदाता के पद पर भेज दिया गया है।

 वहीं गाजियाबाद से जुलाई में ट्रांसफर होकर आए डॉ. गोपाल सिंह को परामर्शदाता सीएचसी सरधना बनाकर भेज दिया गया है। इसके अलावा कुछ और चिकित्सकों का भी स्थानांतरण किया गया है। वहीं सीएमओ डॉ. रमेश चंद्रा अपनी दलील रख रहे हैं कि कुछ चिकित्सकों का शासन से देरी से ट्रांसफर रुका है, जिस कारण उन्हें अब तैनाती दी गई है। वहीं डॉ. जोधा का ट्रांसफर हुआ ही नहीं था और न ही डॉ. सुरेंद्र पाल सिंह का।

लिपिक पर मेहरबान सीएमओ
वरिष्ठ सहायक नरेश त्यागी की मूल तैनाती जिला मलेरिया कार्यालय में है, लेकिन सीएमओ ने अप्रैल से अपने कार्यालय में अटैच कर रखा है। जबकि शासनादेश के हिसाब से किसी भी कर्मचारी का अटैचमेंट नहीं किया जा सकता है।

इस मामले को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप पहल ने डीएम और सीएमओ से लिखित शिकायत के साथ ही आरटीआई में सूचना मांग रखी है। नरेश त्यागी के ऊपर आरोप है कि वो मलेरिया विभाग में अपनी हाजिरी लगाए बिना ही तनख्वाह प्राप्त कर रहा है।

 कुछ लोगों का ट्रांसफर रुका है। इस कारण उनको पोस्टिंग दी जा रही है न की ट्रांसफर किया जा रहा है। इसलिए कुछ चिकित्सकों को नई जगहों पर भेजा गया है, जिसके लिए कोई परमिशन लेने की जरूरत नहीं थी।
विज्ञापन

डॉ. रमेश चंद्रा, सीएमओ
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें