मेरठ। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से प्रभावित किसानों का 37 दिन से मोदीनगर तहसील पर धरना जारी है। मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान कमिश्नर से मिलकर मामले को निपटाने का आश्वासन दिया है। एक-दो दिन में किसानों का प्रतिनिधिमंडल कमिश्नर अनीता सी. मेश्राम से मिलकर मांगे रखेगा। हालांकि, किसानों का कहना है कि मुख्यमंत्री द्वारा कमिश्नर से इस मामले में रिपोर्ट मांगी गई है।
19 गांवों के किसान बढ़े मुआवजे की मांग को लेकर मोदीनगर तहसील में धरनारत हैं। उन्होंने चेताया कि यदि एक्सप्रेसवे का निर्माण पूरा हो जाता है तो इस पर वाहन नहीं चलने दिए जाएंगे। परिवहन मंत्रालय से लेकर केंद्रीय मंत्रियों तक से कई बार वार्ता के बावजूद किसानों की समस्या का हल नहीं निकल सका है। इसलिए किसान आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। किसानों ने दिवाली एवं भैयादूज त्योहार भी मोदीनगर तहसील में ही मनाया। उनका कहना है कि एक तरफ सरकार किसानों को लाभ पहुंचाने का दावा करती है। वहीं, उनकी आवाज दबाई जा रही है।
अंतिम चरण में पहुंचा कार्य
अब एक्सप्रेसवे का डासना से मेरठ तक का कार्य अंतिम चरण में है। ऐसे में यदि किसान कार्य बाधित करेंगे तो एनएचएआई के सामने दिसंबर-2020 के लक्ष्य को पाना चुनौती होगा। वायु प्रदूषण बढ़ने से गाजियाबाद के कुशालिया स्थित हॉट मिक्स प्लांट पहले ही बंद करना पड़ा। हालांकि एनएचएआई का लक्ष्य परतापुर इंटरचेंज और डासना स्ट्रक्चर अतिरिक्त श्रमिक लगाकर अतिशीघ्र पूरा करना है।
त्योहार पर भी जारी रहा निर्माण कार्य-फोटो
परतापुर। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के लक्ष्य को देखते हुए एनएचएआई एवं जीआर इंफ्रा के अधिकारियों के निर्देश पर इंजीनियरों ने त्योहारों पर भी निर्माण कार्य रात-दिन जारी रखा। सोमवार को परतापुर तिराहे पर आरई वॉल लगाने काम जारी रहा। वहीं, भूड़बराल स्थित रजवाहे का चौड़ीकरण कर रैंप का कार्य शुरू कर दिया गया। उधर, अछरौंडा के पीछे टोल प्लाजा के समीप सौर उर्जा के प्लांट की भी पैमाइश की गई। इसके अतिरिक्त बहादरपुर अंडरपास से इमरजेंसी अंडरपास तक बनाई गई सर्विस रोड पर किसानों का आवागमन शुरू हो गया है। गौरतलब है कि सर्विस रोड के लिए किसानों ने एनएचएआई के खिलाफ धरना-प्रदर्शन किया था।