यूपी पुलिस ने बच्चा चोर गैंग का खुलासा किया है। पुलिस ने बच्चा चोरी गैंग में चार महिलाएं राधिका, अनिता, अन्नू और सीमा को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। सीमा ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
मेरठ के लालकुर्ती पैठ बाजार से दो महीने के बच्चे तनुज को चोरी करने के मामले में पुलिस ने शुक्रवार को चारों आरोपियों से सख्ती से पूछताछ की तो सामने आया कि दिल्ली के दंपती को सवर्ण जाति का बच्चा चाहिए था। जब सवर्ण जाति का बच्चा नहीं मिला तो मजबूरी में तनुज को चोरी करके दिल्ली में बेचा जाना था।
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पकड़ी गई सीमा ने बताया कि ब्रह्माण, ठाकुर या अन्य किसी जाति का बच्चा होगा तो पैसे भी अच्छे मिलेंगे और टारगेट भी पूरा हो जाएगा। बच्चा चोरी के मामले में गिरफ्तार महिलाओं के खुलासे ने चौंका दिया है। इन महिलाओं के मुताबिक आठ दिन पहले बच्चे की डिलीवरी दी जानी थी, लेकिन शर्त केवल यह रही कि सवर्ण जाति का बच्चा चाहिए।
जैसे -तैसे एक बच्चा तलाशा लेकिन वह सवर्ण जाति का नहीं मिला। उसे चुराने का प्लान रद करना पड़ा। कुल चार महिलाएं फिलहाल पुलिस ने गिरफ्तार की हैं, जिनसे पूछताछ की जा रही है।
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राधिका ने बताया कि पांच महीने पहले भी एक बच्चा सहारनपुर के गुनारसी गांव में चिह्नित किया, लेकिन चुराने से पहले ही प्लान रद हो गया क्योंकि बच्चा सवर्ण जाति का नहीं था। इसके चलते यह प्लान नहीं हो सका। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि रविवार को आरोपियों को कोर्ट में पेश कर जेल भेजा जाएगा।
अनीता-अन्नू बहुत शातिर
राधिका ने बच्चा चोरी कर मुजफ्फरनगर की अनीता को दिया। अनीता ने वह बच्चा अन्नु को सौंप दिया। अन्नू वह महिला है, जिसे बच्चा दिल्ली पहुंचाने की जिम्मेदारी मिली थी। दिल्ली में बच्चे की डिलीवरी वहां गिरोह संभालने वाली सीमा को देनी थी।
चोरी व ठगी का कई जगह फैला है नेटवर्क
बच्चा चोरी गैंग में चार महिलाएं राधिका, अनिता, अन्नू और सीमा को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। नकली नोटों की टप्पेबाजी के मामले में पुलिस ने साजिद और मेहताब को गिरफ्तार किया है। शिवम और मोहसिन इस मामले में फरार चल रहे हैं। देवबंद के श्रवण के साथ राधिका ने पांच लाख रुपये की ठगी नोटों की गड्डियों में कागज भरकर की है।
एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि 2022 में पुलिस ने होमगार्ड सतेंद्र शर्मा और उसके भाई कृष्ण शर्मा के साथ मोहसिन, नाजिम, महताब और अरशद को जेल भेजा था। उनके कब्जे से 53 लाख के नकली नोट पकड़े थे। इनमें 15 हजार असली थे। उसी गिरोह ने जेल से छूटने के बाद दोबारा से नकली नोट देकर ठगी का धंधा शुरू कर दिया। यह नेटवर्क दिल्ली समेत कई राज्यों में फैला है।