मेरठ। दिल्ली की एक कंपनी ने महानगर के कूड़े से निकलने वाले आरडीएफ (रीफ्यूज डेराइव्ड फ्यूल) से बिजली बनाने का प्रस्ताव नगर निगम को भेजा है। जिसको नगर आयुक्त ने स्वीकृति के लिए शासन को भेज दिया है।
कंपनी का दावा है कि वह नगर निगम से ढाई सौ रुपये प्रति टन आरडीएफ खरीदेगा। जिससे नगर निगम को आय होगी। वहीं महानगर को गंदगी से मुक्ति भी मिलेगी। महानगर से प्रतिदिन 800 से 1000 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है। जिसमें लकड़ी, प्लास्टिक, लोहा आदि काफी मात्रा में होते हैं। इस आरडीएफ से बिजली बनाने के लिए पूर्व में भी कई कंपनियां नगर निगम से संपर्क कर चुकी हैं। पिछले साल भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी के प्रस्ताव पर दिल्ली रोड स्थित बराल में आरडीएफ से बिजली बनाने का प्लांट लगाया गया। उस कंपनी के साथ भी नगर निगम ने अनुबंध किया हुआ है। कंपनी का बिजली अनुबंध भी सरकार के साथ चल रहा है। अब नगर निगम के पास दिल्ली की बियोंड ड्रिलिंग एंड एक्सप्लोरेशन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने शहर के कूड़े से निकलने वाले आरडीएफ से बिजली बनाने का प्रस्ताव रखा है। जिसमें कंपनी के सीईओ डॉ. एसके शिवा कुमार ने नगर आयुक्त को भेजे प्रस्ताव में कहा कि कंपनी 15 मेगावाट बिजली उत्पादन करने वाला प्लांट लगाने जा रही है। जिसको भारी मात्रा में आरडीएफ की जरूरत होगी। उन्होंने नगर निगम को 250 रुपये प्रति टन आरडीएफ की कीमत देने का आश्वासन दिया है। यह प्लांट एनसीआर यानी मेरठ के आसपास ही लगाया जाएगा। इस संबंध में नगर आयुक्त डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया का कहना है कि कंपनी ने आरडीएफ से बिजली बनाने का प्रस्ताव नगर निगम को भेजा है। उस पर नगर निगम प्रशासन स्थानीय स्तर से निर्णय नहीं ले सकता है। इसलिए प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। शासन के आदेश अनुसार कार्य किया जाएगा। आरडीएफ से बिजली बनाने वाली यह कंपनी एनटीपीसी से संबंधित है।