मृत शरीर का तुरंत कर सकेंगे उपयोग
एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में जल्द ही छात्र-छात्राओं के लिए कडैवेरिक लैब (मृत मानव शरीर शव की प्रयोगशाला) शुरू की जाएगी। प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता ने बताया कि अभी तक देहदान के करीब छह माह बाद शव का उपयोग किया जाता है, लेकिन इस लैब में देहदान के बाद से ही उपयोग शुरू हो जाएगा। इससे चिकित्सकों और छात्र-छात्राओं को ऐसा एहसास होगा कि वह जिंदा व्यक्ति की ही सर्जरी कर रहे हैं।
इस साल इनका हुआ देहदान
-डॉ. प्रीति शर्मा (58) निवासी साकेत, मेरठ
-शीला अरोरा (87) निवासी आदर्श कालोनी, मुजफ्फरनगर
-दीपचंद आर्य (75) निवासी मामुरी, सकौती, मेरठ
ऐसे कर सकते हैं देहदान
कोई भी व्यक्ति जो अपना शरीर दान करना चाहता है, वह मृत्यु से पहले स्थानीय मेडिकल कॉलेज या किसी गैर सरकारी संगठन के साथ व्यवस्था कर सकता है। सहमति फार्म भर सकता है। इसमें व्यक्ति के परिवार को भी इसकी जानकारी होनी चाहिए, ताकि मृत्यु के बाद शरीर को मेडिकल कॉलेज ले जा सके। मृत्यु की सूचना पर मेडिकल की टीम जाती है और शव को ले जाती है। कई बार परिवारजन खुद भी शव को पहुंचा देते हैं।
रिटायर्ड अधिकारी ने देहदान किया
एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी (शरीर रचना) विभाग में बुधवार को सीबीआरआई (सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट) में रिटायर्ड परचेज ऑफिसर गजेंद्र कुमार गौड़ (81) का देहदान किया गया। वह शास्त्री नगर के रहने वाले थे। दो अगस्त 2019 को उन्होंने देहदान का संकल्प पत्र भरा था। उनकी अंतिम इच्छा थी कि मरणोपरांत उनका मृत शरीर मेडिकल कॉलेज को दान स्वरूप दे दिया जाए। इसका सदुपयोग एमबीबीएस के छात्रों के पठन पाठन के लिए किया जाए। एनाटॉमी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रीति सिन्हा ने बताया कि गजेंद्र कुमार गौड़ की एक पुत्री हैं। इस दौरान डॉ. कपिल कुमार, डॉ शिखा चंदन, डॉ जगदीप जैन, राम निवास, दीपक कुमार, अरविंद कुमार, नवनीत कुमार और आकाश कुमार आदि मौजूद रहे।