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जीवन में समर्पण ही सबसे बड़ा सुख : मुनि श्री

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भक्तामर विधान में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु। - फोटो : MAWANA
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हस्तिनापुर। दिगम्बर जैन मंदिर में भक्तामर विधान एवं पाठ रविवार को 45वें दिन सौधर्म इंद्र सलिल जैन बने। स्वर्ण कलश से अभिषेक वीनू जैन ने किया। परम पूज्य गुरुवर चैत्यसागर जी ने कहा कि समर्पण ही सबसे बड़ा सुख है। हम उधार की जिंदगी जी रहे हैं। खुशी के लिए सर पर उधार का बोझ उठाए है। जो व्यक्ती मूर्ख है उससे घर का काम क्यों नहीं चलाता है। वह उसी में खुश क्यों नही रहता है। जब भी बीज अंकुरित हो सौ गुना बीजों व दानों को लेकर पैदा हो। पंच परमेष्ठी की आरती का दीप प्रज्ज्वलन संजय जैन पंचकुटीर हस्तिनापुर ने किया। आदिनाथ भगवान की आरती का दीप मीनाक्षी जैन बड़ा मंदिर हस्तिनापुर ने जलाया। चौबीसों भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन ब्रा. सुनीता दीदी के द्वारा किया गया।
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