ब्लू व्हेल गेम में फंसकर मौत का शिकार बना प्रिंस (19) होनहार छात्र था। 12वीं में स्कूल टॉप किया और बीए प्रथम और द्वितीय में वह कॉलेज में तीसरे स्थान पर था। पिता से कहा था कि अंतिम वर्ष में वह टॉपर बन जाएगा। आईएएस बनने का सपना था और इसके लिए वह तैयारी में जुटा था।
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प्रिंस पुत्र संजीव तोमर मूल रूप से शिकोहपुर गांव का रहने वाला था। संजीव तोमर मोबाइल टॉवर लगवाने के ठेके लेते हैं और इन दिनों परिवार के साथ दिल्ली के द्वारिकापुरी में रह रहे हैं। मंगलवार की शाम जब वह अपनी पत्नी बबीता तोमर के साथ एक शादी में शामिल होने शामली गए थे, तभी यह घटना हो गई। परिवार को जानकारी नहीं है कि कब प्रिंस मोबाइल पर ब्लू व्हेल गेम में फंस गया। परिवारीजन जब घर पहुंचे तो प्रिंस का शव फांसी पर लटका मिला। प्रिंस के पास मोबाइल चलता हुआ मिला, जिससे आशंका है कि वह ब्लू व्हेल गेम के चक्कर में ही उसने जान दी है। परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। संजीव ने बताया कि प्रिंस पढ़ाई में बेहद होशियार था, उसका सपना आईएएस बनने का था, इसके लिए वह तैयारी में भी जुटा था। मोतीलाल नेहरू कॉलेज में वह बीए में द्वितीय वर्ष में तीसरे स्थान पर था। संजीव तोमर ने बताया कि उसके दो बेटे हैं, छोटा बेटा अभी 11वीं कक्षा में है।
प्रिंस अधिकतर बातें अपनी मां बबीता से ही शेयर करता था। वह पढाई में बेहद होनहार था और इस बार टॉप करने का वायदा किया था। यही नहीं उसकी मौत से कॉलेज के प्रोफेसर और सहपाठी भी हैरान रह गए।
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पोस्टमार्टम के बाद परिजन बुधवार को शव लेकर पैतृक गांव शिकोहपुर पहुंचे और गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार कर दिया। पीड़ित परिवार को सांत्वना देने के लिए ग्रामीणों का तांता लगा है। ग्राम प्रधान नरेंद्र तोमर, सतबीर सिंह, मनोज कुमार, धर्मेंद्र कुमार, संजीव कुमार, ब्रजपाल, सहदेव सिंह, बबलू, नरेंद्र कुमार, अमरदीप सिंह ने सांत्वना दी।
क्या हुआ था मौत के दिन?
आत्महत्या करने वाले युवक की बिलखती मां
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
मृतक प्रिंस के चाचा मनोज तोमर बताते हैं कि पूरे परिवार को शामली में एक शादी समारोह में जाना था। परिवार तैयारी कर रहा था, लेकिन प्रिंस ने जाने से इंकार कर दिया। अपनी मां से मैगी बनवाकर खाई और यह कहा कि उसकी तबीयत भी ठीक नहीं है और न ही जाने का मन है। प्रिंस को घर में छोड़कर परिवार शामली के लिए चल दिया। जैसे ही कांधला पहुंचे तो पड़ोसी ने बताया कि दरवाजा नहीं खुल रहा है। संजीव ने अपने भाई धर्मेंद्र को कॉल कर मकान पर भेजा। प्रिंस फांसी पर लटका था, पुलिस ने ही उसे उतारा। पुलिस ने उन्हें खुद बताया कि डेथ गेम ब्लू व्हेल से मौत की आशंका है।
खतरा इसलिए, क्योंकि जरूरत बन रहा इंटरनेट
शिक्षा में आए बदलाव के दौर में इंटरनेट अब छात्र-छात्राओं की जरूरत बन रहा है। जूनियर कक्षाओं से लेकर स्नातक तक स्कूल-कॉलेज में ऐसा वर्क बच्चों को दिया जाता है, जिसे वह इंटरनेट का प्रयोग किए बिना पूरा नहीं कर पाते। इस वजह से ही अधिकतर अभिभावक अपने बच्चों को इंटरनेट यूज करने की स्वीकृति देते हैं। घर-घर में कंप्यूटर, लैपटॉप और एंड्रायड फोन का चलन बढ़ रहा है। काम की बातें तलाश करते-करते बच्चे फिजूल बातों में उलझने लगते हैं और इसके आदी हो जाते हैं। यही वजह है कि अब अभिभावक और शिक्षक आगे आकर बच्चों को सही और गलत का ज्ञान दें।
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मृतक के घर पर लगी शोक संवदेना देने वालों की भीड़
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
ब्लू व्हेल गेम के चलते कई परिवार उजड़ चुके हैं। सीएचसी अधीक्षक डॉ यशवीर सिंह कहते हैं कि अभिभावकों को वर्तमान में अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। बच्चों पर निगरानी रखें। किसी भी सोशल मीडिया साइट पर दिए जाने वाले टास्क को कभी भी ज्वाइन नहीं करना चाहिए। सोशल मीडिया पर बच्चों को इस तरह की आदत डालते हैं। कभी भी कहीं बेवजह कोई मेसेज न भेजें। इस तरह का मेसेज मिलने पर तुरंत अभिभावकों, शिक्षकों या पुलिस को बताएं। परिवार और पड़ोस के गुमसुम रहने वाले बच्चों पर नजर रखें और उनके परिवार तक जानकारी पहुंचाएं। थोड़े से प्रयास से किसी की जान बचाई जा सकती है।
जानलेवा गेम से दूसरी मौत
ब्लू व्हेल गेम के जाल में फंसे ककड़ीपुर के न्यू इरा इंटरनेशनल स्कूल के छात्र निशांत की 21 सितंबर को मौत हो चुकी है। शामली के एलम कसबे का छात्र बागपत के ककड़ीपुर गांव स्थित न्यू इरा इंटरनेशनल स्कूल में कक्षा सात का छात्र था। हादसा एलम में हुआ था। छात्र ने ट्रेन से कटकर जान दे दी थी। बागपत में गेम के चक्कर में फंस जाने से प्रिंस की मौत का मामला दूसरा है।
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