आरोप है कि पुलिस ने मृतक पक्ष पर दबाव बनाकर बिना पोस्टमार्टम कराए शव को सुपर्देखाक करा दिया था। इस बाबत पीड़ित पक्ष ने एसएसपी से मिलकर हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराए जाने की मांग की थी। करीब एक माह बाद रिपोर्ट दर्ज की गई थी। तीन माह बाद भी पुलिस ने जांच आगे नहीं बढ़ाई तथा मजिस्ट्रेटी जांच का बहाना बनाती रही।
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि एक सप्ताह पहले मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की गई तो पुलिस हरकत में आई। जहां सोमवार को पुलिस ने मजिस्ट्रेट के रूप में नियुक्त तहसीलदार अभय सिंह, लेखपाल समरपाल सिंह की मौजूदगी में गांव पीलपीखेड़ा के कब्रिस्तान स्थित कब्र से जमीला के शव को बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
हत्या का मामला दर्ज होने के बाद मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में कब्र से शव को निकाला जाना था। जिसके लिए देरी हुई। पोस्टमार्टम के बाद मौत का कारण स्पष्ट हो सकेगा। उसी पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। -मनीष बिष्ट, प्रभारी निरीक्षक थाना खरखौदा।