पहले भी बदले गए शव
6 सितंबर, 2020 मेडिकल कॉलेज में दो पॉजिटिव मरीजों की मृत्यु हुई थी। इनमें एक मेरठ के कंकरखेड़ा के रहने वाले थे और दूसरे गाजियाबाद के मोदीनगर के। लापरवाही के कारण एक शव का अंतिम संस्कार भी कर दिया गया था। इसी के बाद पारदर्शी पैकिंग शुरू हुई थी।
लापरवाही-दर-लापरवाही
मेरठ मेडिकल कॉलेज में लापरवाही की यह कोई पहली घटना नहीं है। मेडिकल में कभी उपचार न मिलने पर मरीज की तड़प-तड़प कर मौत होती है, तो कभी शव के स्ट्रेचर पर मरीजों को खाना परोसा जाता है।
इतना ही नहीं. कोविड जांच के सैंपल लैब से बंदर लेकर भाग जाते हैं तो लैब से जा रही जांच किट ही सड़क पर बिखर जाती हैं। इलाज में लापरवाही से परेशान होकर कभी मरीज भाग जाते हैं। इसके अलावा कोरोना वार्ड के कई ऐसे वीडियो वायरल हो चुके हैं, जो यहां की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़ा करते हैं।
- 29 मई, 2020: पांच कोरोना पॉजिटिव मरीजों के ब्लड सैंपल बंदर छीनकर पेड़ पर जा बैठा था
- 10 अगस्त 2020: माइक्रोबायोलॉजी लैब से वीटीएम (वायरल ट्रांसपोर्ट मीडिया) को नष्ट करने के लिए ले जाया जा रहा था। रिक्शे से पॉलीथिन बैग सड़क पर गिरकर फट गया और वीटीएम बिखर गई
- जनवरी 2019: शूकर ने एक मृत नवजात को मुंह में ले लिया था