आर्य समाज बुढ़ाना गेट पर आयोजित कार्यक्रम।
- फोटो : SAMVAD
आर्य समाज थापरनगर में रविवारीय सत्संग आयोजित हुआ। इसमें राजेश सेठी ने महर्षि दयानंद से क्या सीखें विषय पर प्रेरणादायक उद्बोधन दिया। इसी क्रम में आर्य समाज बुढ़ाना द्वार में राष्ट्र रक्षा यज्ञ की 94वीं श्रृंखला संपन्न हुई।
राजेश सेठी ने महर्षि दयानंद के जीवन प्रसंगों को प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि दयानंद का व्यक्तित्व निर्भीकता, सत्यनिष्ठा और ईश्वर में अटूट विश्वास सिखाता है। 14 वर्ष की आयु में शिवपिंडी पर चूहे की घटना ने सत्य की खोज जगाई। बहन और चाचा की मृत्यु से भी उनमें जिज्ञासा उत्पन्न हुई। दयानंद ने जीवन में अनेक संकटों का सामना किया। उन्होंने सिंह पुरुष की भांति निर्भीक होकर सत्य का उद्घोष किया। काशी शास्त्रार्थ में भी वे भयभीत नहीं हुए। पुणे की घटना में अपमानित होने पर भी सत्य प्रचार जारी रखा। उनके जीवन पर विदेशी संस्कृति का प्रभाव नहीं था। उन्होंने भारतीय संस्कृति, संस्कृत भाषा और राष्ट्र गौरव को बढ़ाने के लिए समाज को प्रेरित किया।
थापरनगर सत्संग का विवरण
कार्यक्रम में धर्मवीर ने ''न कोई साथी न सगा'' भजन प्रस्तुत कर महर्षि दयानंद को याद किया। प्रीति सेठी ने ''अगर ऋषिवर की बातों पर जमाना चल गया होता'' भजन से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। अन्य कलाकारों ने भी भावपूर्ण भजन प्रस्तुत किए। सत्य प्रकाश शास्त्री के ब्रह्मत्व में देवयज्ञ संपन्न हुआ। रंजना राष्ट्रवादी यजमान रहीं और कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
बुढ़ाना द्वार में राष्ट्र रक्षा यज्ञ
आर्य समाज बुढ़ाना द्वार में राष्ट्र रक्षा यज्ञ 101 श्रृंखला का 94वां यज्ञ विधि-विधान से संपन्न हुआ। यज्ञ का संचालन राजवीर शास्त्री ने किया, जिसकी अध्यक्षता अमित कांत ने की। मुख्य वक्ता चंद्रगुप्त कथूरिया ने स्त्री शिक्षा पर प्रकाश डाला, सावित्रीबाई फुले का उदाहरण दिया। जिला प्रधान सुशील बंसल ने ऋषियों की परंपरा से जुड़े होने पर जोर दिया। संजय गुप्ता ने कार्यक्रम का संचालन किया और कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।