नाजुक कलाइयों के हौसले चट्टान से भी बड़े हैं। शहर की बेटियां अपनी आत्म शक्ति के बल पर बड़े-बड़े काम कर रही हैं। हर क्षेत्र में बुलंदी का आसमान छू रही हैं। मेहनत, खुद पर भरोसा और सफलता पाने का जुनून इनकी मंजिल आसान कर रहा है। बेटियां परंपरागत रोजगार की बजाय चुनौती भरे काम चुन रही हैं। मोटर मैकेनिक, फिटर, टर्नर, बिजली मैकेनिक और लाइनमैन बनने की ओर कदम बढ़ा रही हैं। चैत्र नवरात्र के शुभारंभ पर बेटियों की बहादुरी को सलाम करती यह रिपोर्ट।
विज्ञापन
पहले लगा डर, अब आता है मजा
टर्नर ट्रेड में ट्रेनिंग ले रही छात्रा शेफाली, मनीषा और ज्योति लोहे की ईंटों से कलपुर्जे बनाती हैं। शुरू में लोहे को काटने में हाथों में दर्द हुआ। मशीन में हाथ आने का भी डर लगा। लेकिन अब इसी काम में मजा आने लगा है। शिक्षक हर तरह की मदद करते हैं। बकौल छात्राएं, शिक्षकों ने हमारे अंदर एक नयी ऊर्जा सी फूंक दी है।
मैकेनिक बनकर करूंगी सिविल की पढ़ाई
अपने काम को बखूबी करती एक लड़की
मशीन मैकेनिक ट्रेड में मशीनों के कलपुर्जे बनाने का प्रशिक्षण ले रही दीपा नूरनगर से रोजाना साइकिल से आईटीआई आती हैं। दीपा के पिता नहीं हैं। तीन बहनों में दीपा बीच की है। मां मजदूरी करके परिवार का खर्चा चलाती हैं। दीपा कहती हैं मेरा सपना तो डीएम बनना है। लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं कि मैं इतना पढ़ सकूं। मम्मी मजदूरी करके खर्चा चलाती हैं। मैंने आईटीआई में इसलिए प्रवेश लिया पहले मैकेनिक बन जाऊं, हाथ में एक रोजगार हो जाएगा। मैकेनिक बनकर जो काम करूंगी उस पैसे से अपनी सिविल की पढ़ाई पूरी करूंगी।
करंट के झटके हमारा क्या बिगाड़ेेंगे
मेरठ में काम सीखती लड़कियां
इलेक्ट्रिशियन ट्रेड में रोजाना बिजली के झटकोें से जूझने का हुनर सीख रहीं सोनिका, सरोज और प्रियंका इतनी मजबूत हो चुकी हैं कि अब उन्हें करंट से डर नहीं लगता। प्रियंका कहती है इस ट्रेड में लड़कियों को अच्छी नौकरी मिल जाती है, इसलिए मैंने यह लाइन चुनी। शुरू में करंट लगा, डर भी लगा लेकिन अब कोई डर नहीं लगता। सरोज और सोनिका भी ट्रांसफार्मर बनाने से लेकर बिजली उपकरणों को सुधारने बनाने के काम में माहिर हैं।
देश की पहली महिला मोटर मैकेनिक पूनम
काम करतीं लड़कियां
टिमकिया गांव के दो बीघा जमीन के किसान जलसिंह की बेटी पूनम देश की पहली महिला मोटर मैकेनिक बनी हैं। 15 जुलाई 2015 में पूनम को स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में महिला मोटर व्हीकल मैकेनिक का जॉब कार्ड देकर सम्मानित किया। पूनम निजी कार कंपनी में सुपरवाइजर हैं। बकौल पूनम इतने पैसे नहीं कि महंगी पढ़ाई कर पाती। गांव से रोजाना मेरठ बस से आकर पढ़ाई पूरी की और आईटीआई में प्रवेश ले लिया। मैं अपनी क्लास में अकेली लड़की थी। लड़के मुझ पर हंसते थे, मजाक बनाते थे। लेकिन मुझे अपना कॅरियर बनाना था, इसलिए उनके मजाक को कभी ध्यान नहीं दिया। मेरा सपना सरकारी नौकरी में जाना है। ट्रेनिंग के दौरान कई बार हाथ जले, काले भी हुए, हाथों में दर्द भी हुआ। लेकिन मेरे लक्ष्य के आगे सब फीके पड़ गए।
ट्रेड्स और उनमें होने वाला काम
1. इलेक्ट्रिशियन - बिजली के करंट से सीधे खेलना होता है। बिजली उपकरणों की मरम्मत, नए बिजली उपकरण बनाना, खंभा बनाना, ट्रंासफार्मर बनाना, वायरिंग, मोटर वायरिंग आदि काम होते हैं।
2. फिटर- इस ट्रेड में लोहे की भारी ईंटों से नट, बोल्ट, कलपुर्जे, मशीन के पार्ट, छोटे उपकरण व लोहे के अन्य सामान बनते हैं। लोहे के पतले कटर से लोहे की ईंटाें को घिसकर, काटकर आकार देते हैं। मशीन के बजाय हाथों का इस्तेमाल होता है। बाजूओं की मजबूती बहुत जरूरी है।
3. टर्नर- इस ट्रेड में लोहे की मोटी चादरों, गोल ठोस मोटी रॉड को मशीनों पर चढ़ाकर अन्य मशीनों के पार्ट, कलपुर्जे व नटबोल्ट आदि बनते हैं। हाथ से पुर्जा बनाकर मशीन से फिनिशिंग होती है।
4. मोटर मैकेनिक- मोटर मैकेनिक व्हीकल ट्रेड में दोपहिया, चार पहिया वाहनों क ो बनाना, सुधारना, इंजन बंाधना, वाहनों को चढ़ाना व अन्य रिपेयरिंग काम सिखाया जाता है।
5. रेफ्रिजरेशन- इस ट्रेड में एसी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, टीवी व अन्य बिजली के उपकरणों को सुधारना, नए उपकरण बनाने का प्रशिक्षण देते हैं।
साकेत में आईटीआई के प्रिंसिपल नवाब सिंह ने बताया कि जिन ट्रेडस में पहले लड़कियों की संख्या एक या दो होती थी, अब हर साल उनमें छात्रों के साथ छात्राओं की संख्या बढ़ रही है। यह प्रमाण है कि छात्राएं आम स्वरोजगार के अलावा मुश्किल स्वरोजगार पाठ्यक्रमों में भी अपनी धमक जमा रही हैं।
तीन सालों में लड़कियों की बढ़ी संख्या
ट्रेड 2014 2015 2016
इलेक्ट्रिशियन- 8 10 11
फिटर- 7 8 8
टर्नर- 3 3 5
मशीन मैकेनिस्ट- 3 3 4
मोटर मैकेनिक- 1 1 2
रेफ्रिजरेशन- 1 1 2