जंबूद्वीप में दशलक्षण पर्व में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु।
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हस्तिनापुर। जंबूद्वीप में दशलक्षण महापर्व के समापन पर बृहस्पतिवार को क्षमावाणी पर्व मनाया गया। गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माता जी ने कहा कि दशलक्षण महापर्व क्षमा से प्रारंभ होकर क्षमावाणी पर समाप्त होता है। इसमें विशेष रूप से एक-दूसरे से हम क्षमा की प्रार्थना करते हैं। प्रेम का यह पर्व यही संदेश देता है कि हम एक-दूसरे के प्रति हृदय में क्षमा धारण करें।
जंबूद्वीप में चल रहे दशलक्षण महापर्व के दसवें दिन क्षमावाणी पर्व पर गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माता ने बताया कि क्षमा वीर पुरुषों के लिए एक आभूषण के समान है। कायर व्यक्ति क्षमा नहीं कर सकता। क्षमा अंतरंग से धारण की जाती है, क्षमा आत्मा का गुण है। आचार्यों ने लिखा है कि उत्तम क्षमा जहां मन होई, अंदर बाहर शत्रु न कोई। यह पंक्ति भले ही छोटी है, लेकिन इसका सार बहुत बड़ा है। उत्तम क्षमा धारण करने वाले व्यक्ति का सारे संसार में कोई भी शत्रु नहीं होता। यह एक विशेष पर्व है, जिसे संपूर्ण जैन समाज पूरे विश्व में जहां भी रहते हैं वहां उसे मनाकर एक-दूसरे से क्षमाभाव करते हैं। प्रेम का यह पर्व हमें संदेश देता है कि हम सदैव भले ही अंतरंग से अलग हों, लेकिन बाहर में हम सब एक हैं। यह हमारे क्षमा गुण का सर्वोपरि लक्षण है। इसी क्रम में प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका चंदनामती माता जी ने कहा कि हम साधु तो एक दिन में दो बार हर किसी से आपस में प्रतिक्रमण के माध्यम से आपस में हुई गलतियों की क्षमा-याचना करते हैं, लेकिन वर्ष में श्रावक के लिए दशलक्षण महापर्व के बाद यह दिन आता है। वात्सल्य का यह पर्व संपूर्ण देशवासियों को जातिवाद भुलाकर एक-दूसरे से क्षमाभाव अवश्य करना चाहिए। पीठाधीश स्वस्ति रवींद्र कीर्ति स्वामी ने संपूर्ण समाज से क्षमायाचना करते हुए सबसे क्षमा-सबको क्षमा का संदेश दिया। संस्था के मंत्री विजय कुमार जैन ने बताया कि समाज के अनेक वरिष्ठ लोगों ने पहुंचकर अपने-अपने वक्तव्य के माध्यम से क्षमायाचना की। सजन जैन, सुभाष चंद जैन साहू, हस्तिनापुर, संजय कुमार जैन, राकेश जैन मेरठ, आनंद प्रकाश जैन दिल्ली, डॉ. जीवन प्रकाश जैन जंबूद्वीप आदि मौजूद रहे। इसी के साथ दशलक्षण महापर्व का क्षमावाणी पर्व भी समापन हुआ।